बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने नीट ‘प्रश्नपत्र लीक’ की जांच तेज करते हुए रविवार को पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया. इन आरोपियों को एक दिन पहले झारखंड के देवघर से हिरासत में लिया गया था. इसके साथ ही मामले में अब तक 18 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं.
नीट यूजी परीक्षा को लेकर बवाल जारी है. देश के तमाम राज्यों से पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है. इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निर्देश के बाद इस मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया है. जिससे केंद्रीय एजेंसी के लिए जांच करने का रास्ता साफ हो गया है. वहीं बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पांच और संदिग्धों को झारखंड के देवघर से हिरासत में लिया गया था. जिसके बाद इस मामले में पकड़े गए लोगों की कुल संख्या 18 हो गई है.इससे पहले सीबीआई ने पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के संदर्भ में एफआईआर दर्ज की थी. मामला आईपीसी की धारा 407, 408, 409, 120बी के तहत दर्ज किया गया है, जो 5 मई को आयोजित एनईईटी यूजी 2024 परीक्षा में अनियमितताओं से संबंधित है. मामले की जांच के लिए सीबीआई टीम के जल्द ही पटना आने की उम्मीद है. जिसके बाद ईओयू मामले के रिकॉर्ड सीबीआई को सौंप देगा. ईओयू के बयान के मुताबिक गिरफ्तार किए गए पांच लोगों की पहचान बलदेव कुमार, मुकेश कुमार, पंकू कुमार, राजीव कुमार और परमजीत सिंह के रूप में की गई है, जो सभी नालंदा के रहने वाले हैं. कुख्यात संजीव कुमार उर्फ लुटन मुखिया गिरोह से जुड़े बलदेव कुमार को कथित तौर पर परीक्षा से एक दिन पहले अपने मोबाइल फोन पर पीडीएफ के रूप में नीट यूजी का पेपर मिला था. ईओयू के बयान के मुताबिक लीक हुआ नीट-यूजी पेपर मुखिया गिरोह द्वारा झारखंड के हजारीबाग के एक निजी स्कूल से प्राप्त किया गया था. जांचकर्ताओं ने पटना के एक घर से बरामद आंशिक रूप से जले हुए प्रश्न पत्र का राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा उपलब्ध कराए गए पेपर से मिलान किया, जिससे लीक की पुष्टि हुई. इस मामले में ईओयू ने पेपर को संभालने की जिम्मेदारी संभालने वाले कई लोगों से पूछताछ की है. जिनमें बैंक अधिकारी और एक कूरियर कंपनी के कर्मचारी भी शामिल थे.
