राखी के धागे में सिमटा था पूरे कुनबे का प्यार
गेरू से सजे कच्चे घरों से लेकर कलाई पर बंधे ‘राखा’ तक… बुजुर्गों की यादों में आज भी जिंदा है रक्षाबंधन का वह दौर (राजभूषण सिंह) कंपिल, समृद्धि न्यूज। सावन की फुहारों के साथ जैसे ही रक्षाबंधन की आहट होती थी, गांव के कच्चे घरों और गलियों की छटा ही बदल जाती थी। गोबर-मिट्टी से…
