ओडिशा: नदी पार करते समय 73 भैंसों की डूबने से मौत, कराया जा रहा पोस्टमार्टम

केंद्रापाड़ा: ओडिशा के केंद्रापाड़ा जिले के औल क्षेत्र के एकमानिया गांव में तीन परिवारों की 73 भैंसें नदी पार करते वक्त डूब गईं और सभी की मौत हो गयी। घटना के बाद पूरे गांव में हडक़ंप मच गया है। भैंस मालिक बर्बादी की कगार पर पहुंच गये।
जानकारी के मुताबिक गांव के तीन लोग गणेश दास की ४० भैंसे, जगन्नाथ दास की १७ और पागला बिश्वाल की १६ भैंसे रोज़ की तरह चराने के लिए ले गए थे। वापसी के समय जब भैंसें गलिया नदी पार कर रही थीं, तभी अचानक नदी का बहाव तेज हो गया। तेज बहाव में फंसकर भैंसें आगे नहीं बढ़ सकीं और एक के बाद एक डूबने लगीं। देखते ही देखते 73 भैंसों की जान चली गई।

तीन किसान हुए बर्बाद

इस हादसे में किसान गणेश दास की 40, जगन्नाथ दास की 17 और पागला विश्वाल की 16 भैंसों की मौत हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान गणेश दास को हुआ है, उनकी 15 से अधिक भैंसें दूध देती थीं, जिनसे पूरे परिवार का खर्च चलता था। अब तीनों किसान टूटे दिल से यही सवाल कर रहे हैं कि परिवार का भरण पोषण कैसे करेंगे। इस घटना के बाद गांव वालों में कई तरह के शक भी पैदा हो गए हैं। एक साथ इतनी भैंसों की मौत होना लोगों को सामान्य नहीं लग रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि शायद नदी का पानी जहरीला हो गया हो। ग्रामीण प्रशासन से पीडि़त किसानों को तुरंत मुआवज़ा देने की मांग किया है।
गांव के नाथू प्रधान ने कहा है कि ऐसा हादसा हमने कभी नहीं देखा। एक ही दिन में गांव की तीन परिवारों की रोज़ी रोटी छिन गई। पीडि़त किसान गणेश दास ने रोते हुए कहा कि मेरे लिए ये भैंसें सिर्फ जानवर नहीं थीं, बल्कि मेरा परिवार थीं। अब बच्चों का पेट कैसे पालूंगा, समझ नहीं आ रहा। घटना की जानकारी मिलते ही एक वेटनरी डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। भैंसों का पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है, ताकि सही वजह सामने आ सके। अभी तक मौत का असली कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन जांच जारी है।

आरोप: जहरीला पानी बना मौत का कारण

सूत्रों की माने तो ग्रामीणों का आरोप है कि शनिवार को भाटा (ज्वार उतरने) के समय कुछ असामाजिक तत्वों ने नदी में बागदा झींगा पकडऩे के लिए ज़हर डाला था। ज्वार के साथ आए झींगे ज़हर से मरकर किनारे लगते हैं, जिन्हें छांटकर उठा लिया जाता है, लेकिन उसी जहरीले पानी को पीने से भैंसों की मौत हो गई।
कलेक्टर ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। प्रभावित किसानों को आपदा राहत कोष से उचित मुआवज़ा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साथ ही, ज़हर डालने के आरोप की जांच पुलिस करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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