खानकाहे व दरगाहें मानवता का प्रतीक: सज्जादा नशीन

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। शहर की एतिहासिक व गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल की लोको स्थिति दरगाह हजऱत मखदूम शाह सय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा में रजब उल मुरज्जब महीने की 16वीं शरीफ के मौके पर हजऱत मौला अली व सय्यद शहाबुद्दीन औलिया का जन्मदिन भी बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। दूर दराज से आए अकीदतमंदों ने अपने-अपने तरीके से फूल वा चादर पेश की और हजऱत मौला अली व सय्यद शहाबुद्दीन औलिया के जन्मदिन के मौके पर जायरीनों ने केक बतौर तबर्रुख पेश किया। वहीं विलादत हजऱत मौला अली और विलादत हजऱत सय्यद शहाबुद्दीन औलिया 13 रजब यानी शनिवार को खानकाह शरीफ में मुनक्किद हुई, नजऱों नियाज़ कर लंगर तकसीम किया, सोलहवीं शरीफ के दिन जिसमें सभी मजहब के जायरीनों ने हाजिरी दी और अपनी अकीदत पेश की तथा लंगर भी तकसीम किया गया। दरगाह शरीफ के सज्जादा नशीन व जानशीन ए हुज़ूर मोहब्बत शाह हजऱत पीरजादा शाह मोहम्मद वसीम उर्फ मुहम्मद मियां ने कहा ये दरगाहें मानवता का प्रतीक और तर्जुमान है इंसानियत का। सूफी संतों ने सदैव अमन संदेश देने के साथ सभी धर्मों का सम्मान करने की शिक्षा दी है। आज सूफी संतो की शिक्षा से दूरी हमारे भाई चारगी को समाप्त कर रही है। हर दौर में औलिया-ए कराम ने अमन भाई चारगी का सन्देश इनके आस्ताने पे आने वालों को रूहानी फैज के साथ साथ इंसानियत का भी पैगाम मिलता है, सूफी संतों ने समाज से बुराइयों को मिटा कर एक साथ और सच्चे समाज की बुन्याद रख्खी है और चारों ओर मोहब्बत के हमेशा चिराग रोशन करते रहे। अलीगढ़ के मशहूर शायर यूसुफ हातिफ ने हाले गेम दिल अपना रो रोके वही कहना हातिफ तेरे रहते है मखार मदीने में। शायर बिलाल शफीकी ने मेरे अली का जश्ने विलादत हरम में है, सारी फज़ीलतों की फजीलत हरम में है। इस मौके पर कव्वाली पढक़र समा बांधा और कमालुद्दीन ने कलाम पेश किये। मौलाना शोयब आतिर, हाफिज फरहान, हाफिज अयान व आरिश साबरी, बिलाल साबरी ने कुरान पाक की तिलावत की। इस मौके पर मुहम्मद हनीफ उर्फ बबलू, हाजी अकरम, तनवीर खान, फहीम उर्फ राजू, फजल अहमद, रफत हुसैन, मोवीन सबरी, राहुल, अंसार साबरी, आकाश, शिवम आदि मौजूद रहे।

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