गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार (25 जनवरी) को देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने पिछले वर्ष देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, उन्होंने देश की बेटियों की उपलब्धियों का जिक्र किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को राष्ट्र के नाम संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, हम हम, भारत के लोग देश और विदेश में उत्साह के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस का यह पावन अवसर हमें हमारे देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य की स्थिति और दिशा पर विचार करने का अवसर देता है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत की लोकतांत्रिक यात्राए संवैधानिक आदर्शों और साझा जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय उपलब्धियों को रेखांकित किया साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित कीण्।

उन्होंने नागरिकों से एक समृद्धए आत्मनिर्भर और प्रगतिशील भारत की दिशा में सामूहिक रूप से कार्य करते हुए एकता, समावेशिता और दृढ़ता को मजबूत करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वंदे मातरम का इतिहास बताते हुए यह गीत कहा कि हम, भारत के नागरिक, देश और विदेश मेंए गणतंत्र दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाएंगे।

गणतंत्र दिवस का यह शुभ अवसर हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में अपने देश की स्थिति और दिशा पर चिंतन करने का अवसर प्रदान करता है। हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की शक्ति ने 15 अगस्त, 1947 को हमारे देश की स्थिति बदल दी। भारत स्वतंत्र हुआ, हम अपने राष्ट्रीय भाग्य के निर्माता बने।

 

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