-घटना का खुलासा और एफआईआर को लेकर कई सवाल अनुत्तरित
समृद्धि न्यूज़ अयोध्या। रविवार को जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूमि का एग्रीमेंट कराए जाने से जुड़ी करीब साल भर से अधिक पुरानी घटना के खुलासा कर दिया गया।प्रेसवार्ता में सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि 24 फरवरी यानी रविवार को संगीन धाराओं में दर्ज किए गए मुकदमे में एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी के दिखाए रास्ते से ही घटना का खुलासा किया गया है।घटना में शामिल रहे जनपद बस्ती के हरैया निवासी अजय कुमार और हरिशंकर वर्मा नामक दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में न्यायालय भेजा जा रहा है लेकिन गौर करने वाली बात यह रही कि घटना के अन्य अभियुक्त कौन कौन हैं तथा साल भर से अधिक पुरानी इस घटना के खुलासे और अभियुक्तों की गिरफ्तारी में इतनी देरी कैसे हो गई?इसका जवाब देना तो दूर,चर्चा तक नहीं की गई।
प्रेसवार्ता में बताई गई घटना और किया गया खुलासा
प्रेसवार्ता के दौरान बताया गया कि आरोपी हरिशंकर वर्मा अपने पिता की दवा इलाज हेतु फैजाबाद आता जाता रहता था।इसी दौरान उसकी मुलाकात उसके पूर्व परिचित अशोक कुमार शुक्ला जो जैतापुर चनहा के रहने वाले हैं,से हुई।उनके द्वारा हरिशंकर वर्मा को कनक अस्पताल के सामने खाली प्लाट दिखाते हुए कहा गया कि यह खाली जमीन लावारिस है।इसके बारे में तुम खोजबीन कर लो और चाहो तो जमीन को अपने नाम से एग्रीमेण्ट कराकर बेंच दो।इस पर हरिशंकर वर्मा द्वारा उक्त जमीन को आनलाइन सर्च किया गया तो उक्त जमीन मनीराम निवासी अकबरपुर के नाम से होना पाया गया। हरिशंकर द्वारा अकबरपुर में मनीराम की तलाश की गयी लेकिन मनीराम नाम के व्यक्ति का अम्बेडकरनगर में पता न चल पाने के कारण हरिशंकर वर्मा द्वारा अपने भांजे से एक आदमी (लेबर) काम हेतु उपलब्ध कराये जाने हेतु कहा गया।इस पर हरिशंकर वर्मा के भांजे लल्ला उर्फ राजेश वर्मा द्वारा अजय कुमार निवासी जनपद बस्ती से मुलाकात करायी गयी।हरिशंकर वर्मा और अजय कुमार ने आपस में मिलकर हरिशंकर वर्मा द्वारा अजय कुमार के आधार में छेड़छाड़ करते हुए अजय कुमार के नाम व निवास स्थान पर मनीराम निवासी अकबरपुर दर्ज कराते हुए अपने मित्र शीतला प्रसाद के माध्यम से जगदम्बा प्रसाद को जमीन दिखाकर जगदम्बा प्रसाद से डेढ़ लाख रूपया लेकर अजय कुमार को मनीराम बताते हुए गाटा संख्या 63 रकबा 130 वर्ग मीटर आवासीय जमीन ग्राम भीखापुर की तय शुदा रकम सात लाख, रकम बयाना पेशगी तीन लाख रूपये में अपने तथा जगदम्बा प्रसाद के नाम से एग्रीमेण्ट करा दिया गया।
यह है एफआईआर की पूरी घटना
एफआईआर में न्यायालय विशेष न्यायाधीश एससी\एसटी को संबोधित प्रार्थना पत्र अर्न्तगत धारा 173 (4) बीएनएसएस में देवकाली बाईपास थाना कोतवाली अयोध्या अंतर्गत निवासी मनीराम द्वारा 09 अक्टूबर वर्ष 2024 की घटना तथा उपनिबंधक कार्यालय तहसील सदर थाना कोतवाली अयोध्या को घटनास्थल दर्शाते हुए अंबेडकरनगर निवासी मनीराम, हरैया निवासी हरिशंकर वर्मा,हरैया निवासी जगदम्बा प्रसाद,हरैया निवासी शीतला प्रसाद तथा बस्ती निवासी रामकिशोर को आरोपी बनाया गया है।बताया गया है कि प्रार्थी ने एक पोख्ता पक्का मकान दो मंजिला भूमि गाटा सं 63 मि रकबा 001.30 हे क्षेत्रफल मे लगभग 25 वर्ष पूर्व में वि.प्रा. से नक्शा पास करवाकर बनवाया था और तभी से अपने उपरोक्त मकान में सपरिवार निर्विवाद रूप से गुजर बसर करता चला आ रहा है।बीती 15 दिसंबर वर्ष 2024 को अफवाहन प्रार्थी को घर के सामने चाय की दुकान पर जानकारी हुई कि प्रार्थी की उपरोक्त भूमि का ऐग्रीमेंट/ बयानानामा प्रार्थी के स्थान पर किसी दूसरे अज्ञात व्यक्ति ने मनीराम बनकर 09 अक्टूबर वर्ष 2024 को क्रेतागण विपक्षी सं. दो व तीन के पक्ष में विपक्षी सं. एक तथाकथित विक्रेता मनीराम के द्वारा निष्पादित कर दिया गया है।इकरारनामे के बारे मे जानकारी होने पर प्रार्थी जब उपनिबंधक कार्यालय सदर गया और अभिलेखों का मुवायना करवाया तो उपरोक्त बाते सही निकली ततपश्चात नकल प्राप्त की उसके बाद विपक्षीगणों के द्वारा किये और करवायें गये कूटरचित षड्यन्त्रकारी, जालसाजी बयानानामा/ इकरारनामा की जानकारी हुई। विपक्षी सं. एक व विपक्षी सं दो एवं तीन ने इकरारनामा दस्तावेज में इस बात का उल्लेख किया है कि विक्रेता अनुसूचित जाति का नहीं है जबकि प्रार्थी उपरोक्त भूमि गाटा सं 63 मि रकबा 0.0130 हे. का वास्तविक भू स्वामी है और अनुसूचित जाति (चमार विरादारी) का ही व्यक्ति है।प्रार्थी की आयु लगभग 68 वर्ष की है और दि न्यू इन्डिया इन्शोरेन्स कम्पनी में वरिष्ठ सहायक के पद से सेवानिवृत कर्मचारी है जबकि प्रार्थी के स्थान पर फर्जी बना मनीराम इकरारनामा/ बयानानामा दस्तावेज में चस्पा फोटो के अनुसार उसकी शक्ल मात्र 30-32 वर्ष की दिखायी पड़ रही है।विपक्षीगणों के बारे में प्रार्थी को दूर-दूर तक कोई जानकारी नही है परन्तु विपक्षी लोगों के द्वारा तहरीर करवाये गये फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज इकरारनामें को देखने मात्र से ही बिल्कुल साफ तौर पर स्पष्ट है कि विपक्षीगणों का एक बहुत ही बड़ा भू-माफियों का सक्रिय एवं संगठित गिरोह है जो बाहरी जनपदों तक फैला हुआ है और उपनिबन्धक कार्यालय तक के कर्मचारीगण व अहलकारान तक इस तरह के फर्जीवाड़े मे सम्मिलित है।ऐसा प्रतीत होता है कि विपक्षीगण आदतन अभ्यस्ती किस्म के है। विपक्षीगणों ने पंजाब एंड सिंध बैंक में फर्जी तरीके से लगभग दो करोड़ रूपये के लोन के लिए भी आवेदन किया है है जिसकी जानकारी प्रार्थी को सात-आठ दिन पहले हुई है।जब प्रार्थी के पैतृक गांव में बैंक के अधिकारी जांच करने गये थे और बैंक के जांच अधिकारी ने प्रार्थी को फोन करके ऋण के बारे में पूछा तो प्रार्थी की होश उड़ गए।इस घटना के बारे मे प्रार्थी ने बीती 20 दिसंबर वर्ष 2024 को थाने पर व 22 दिसंबर वर्ष 2024 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से मिलकर तथा 27 दिसंबर वर्ष 2024 को पुनः वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जरिये पंजीकृत डाक से शिकायती प्रार्थना पत्र भेजा था परन्तु आज तक विपक्षीगणों के विरुद्ध व कोई कार्यवाही नही हुई।इसके बावजूद एक जनवरी वर्ष 2025 को प्रार्थी की गैर मौजदूगी में विपक्षीगणों में से कोई दो अज्ञात व्यक्तियों ने चार-पांच बजे दिन में आकर मेरी पत्नी व बच्चो को मां बहन बेटी की जाति सूचक गालियां देकर मुझे जान से मार देने की धमकी देकर चले गये।प्रार्थी पहले से ही हार्ट बीपी का मरीज है।लखनऊ में आपरेशन भी हुआ था और दवा इलाज अभी भी चल रही है।प्रार्थी व प्रार्थी का पूरा परिवार उक्त घटना से और भी शारीरिक,मानसिक, समाजिक एवं आर्थिक रूप से काफी पीड़ित एवं परेशान है। अतैव विवश होकर श्रीमान जी के न्यायिक क्षेत्राधिकार में न्याय पाने हेतु यह प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना पड़ रहा है।न्यायालय श्रीमानजी से प्रार्थना है कि प्रार्थी के द्वारा प्रस्तुत किये प्रार्थना पत्र मे वर्णित किये गये तथ्यों की गंम्भीरता का संज्ञान लेते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचारोपरान्त विपक्षीगणों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना करने हेतु थाना प्रभारी कोतवाली नगर जनपद अयोध्या को आदेशित करने की कृपा करे।
सवाल जिनका जवाब मिलना बाकी है
इस पूरे मामले में अब सवाल यह उठ खड़े हुए हैं कि यदि घटना वर्ष 2024 के दिसंबर माह की है तो उसी दौरान इसका मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया?एफआईआर में तहरीर न्यायालय श्रीमान विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी के विवरण को संबोधित है,तो क्या मुकदमा न्यायालय के आदेश पर दर्ज किया गया है?प्रार्थना पत्र में आरोपी पांच लोगों को बनाया गया है तो अभियुक्त केवल दो लोग ही क्यों बताए जा रहे हैं और गिरफ्तारी केवल दो लोगों की ही क्यों हुई है?इसके साथ घटनास्थल यदि कोतवाली नगर क्षेत्र का है और प्रार्थना पत्र में प्रार्थना थाना कोतवाली नगर में अभियोग पंजीकृत किए जाने को लेकर की गई है तो विवेचना क्षेत्राधिकारी अयोध्या स्तर से कैसे हो गई?
