जीएसटी की समस्याओं को लेकर व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन

समस्या के निराकरण का मिला आश्वासन
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार व्यापारियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। जिसको लेकर जीएसटी के अन्तर्गत ६ सूत्रीय जीएसटी प्रमुख सचिव कामिनी रतन सिंह व कमिश्नर जीएसटी अमित बंसल को फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मण्डल के जिलाध्यक्ष मनोज मिश्रा के नेतृत्व में व्यापारियों ने सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि जनपद को अधिकरण आगरा के क्षेत्राधिकार में शामिल किया जा रहा है। कन्नौज आदि जनपदों का माल एवं सेवाकर अधिकरण लखनऊ के क्षेत्राधिकार में शामिल किया जाना व्यापारियों के हित में है। कर अवधि 2017-18, 2018-19, 2019-2020 में आरोपित व्याज, अर्थदण्ड माफी योजना को कर अवधि सन् 2023-24 तक आगे लागू किया जाय। कर अवधि 2017-18, 2018-19, 2019-2020 में गलती से जीएसटीआर 2ए में प्रदर्शित आईटी का जीएसटी 3बी क्लेम न किये जाने के कारण व्यापारियों को आर्थिक क्षति हो रही है एवं उनके विरूद्ध वसूली की कार्यवाही प्रारम्भ की जा चुकी है, यदि जीएसटीआर 2ए में प्रदर्शित आईटीसी का लाभ दे दिया जाता है तो अनावश्यक विभागीय कार्यवाही भी रूकेगी एवं व्यापारी को दोहरे टैक्स से बचाया जा सकेगा। अनेक व्यापारी जिनका व्यापार सन् 2020-21 से है उनके पास आय का पर्याप्त साधन भी नहीं हैं उनके विरूद्ध वसूली कार्यवाही की जा रही है। यदि जीएसटीआर 2ए में प्रदर्शित आईटीसी लाभ दिया जाना न्यायोचित है। जीएसटीआर 2ए प्रदशित आईटीसी लाभ दिये जाने से ऐसे व्यापारी जिनका व्यापार बन्द है आय का कोई पर्याप्त साधन भी नहीं, उन्हें व उनके परिवार को आर्थिक कष्ट से बचाया जाना चाहिये। यह मानवीय आधार भी है साथ ही प्राकृतिक न्याय सिद्धांत से भी जिसने कर भुगतान आईटीसी के रूप में किया है उसे आईटीसी का लाभ प्राप्त होना चाहिये। एडीशनल कमिश्नर (ग्रेड-2) अपील इटावा को जनपद स्तर पर माह में एक बार कैम्प कर अपीलों की सुनवाई हेतु निर्देशित किया जाय। जीएसटी अधिकारियो द्वारा जो नोटिस व आदेश जारी किये हैं वह व्यापारियों के संज्ञान में तब आये हैं जब उनके विरूद्ध वसूली कार्यवाही प्रारम्भ हेतु अधिकारी उनसे सम्पर्क में आये है। ऐसे व्यापारी जिसका पंजीयन निरस्त किये जाने के उपरान्त नोटिस जीएसटी पोर्टल पर जारी किये हैं जो व्यापारियों के संज्ञान में नहीं आये ऐसे नोटिसों की तामीला विधिवत मानते हुये उपधारा-73 में आदेश जारी किये गये हैं एवं विधि विरुद्ध ढंग से आधारहीन तर्को पर धारा-74 के अन्र्तगत आदेश जारी कर भारी कर ब्याज एवं अर्थदण्ड आरोपित किया गया है जो न्यायसंगत नहीं है, आदि मांगें शामिल है। इस अवसर पर व्यापारी मौजूद रहे।

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