खंड विकास अधिकारी पर ग्राम पंचायत सचिवों ने लगाए गंभीर आरोप

अभद्र भाषा, अवैध वसूली और अनावश्यक दबाव की शिकायत जिलाधिकारी से

सैफई : विकास खंड सैफई में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब ग्राम पंचायत सचिवों ने खंड विकास अधिकारी पर अभद्र भाषा के प्रयोग, अवैध धन की मांग और मानसिक दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी इटावा को संयुक्त रूप से शिकायती पत्र सौंपा। सचिवों का कहना है कि लगातार दबाव और नियम विरुद्ध कार्य कराने की कोशिशों से पंचायतों का कामकाज प्रभावित हो रहा है।
शिकायत पत्र में खंड विकास अधिकारी गौरव पुरोहित पर आरोप लगाए गए हैं। सचिवों के अनुसार, उनके पास दो विकास खंडों का प्रभार है, जिसके चलते वे सैफई ब्लॉक में नियमित रूप से समय नहीं दे पा रहे हैं। इसके बावजूद दूर से ही फोन और पत्राचार के माध्यम से अनावश्यक दबाव बनाकर कार्य कराने का प्रयास किया जाता है।
शिकायत करने वालों में ग्राम पंचायत सचिव संजीव कुमार, भानु प्रताप, मनीष कुमार, नागेंद्र प्रताप सिंह, सिद्धार्थ गुप्ता, मोहम्मद आरिफ , अमित सिंह विवेक चौधरी और इम्तियाज अतहर शामिल हैं। सचिवों का आरोप है कि कार्यालयीय बैठकों और बातचीत के दौरान अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जिससे कर्मचारियों की गरिमा को ठेस पहुंचती है और कार्य वातावरण बिगड़ता है।
सचिवों ने शिकायत में उल्लेख किया है कि पंचायतों से प्रतिमाह 1000 से 1500 रुपये तक की धनराशि की मांग की जाती है। राशि न देने की स्थिति में कार्रवाई की धमकी दी जाती है। इसके अलावा मनरेगा कार्यों में सामग्री मद एवं मस्टर रोल के नाम पर सात प्रतिशत कमीशन मांगे जाने का आरोप भी लगाया गया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि अन्नपूर्णा भवन निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्र, इंटरलॉकिंग सड़क, लाइब्रेरी निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में भी कथित रूप से धन उगाही एवं क्लस्टर हटाने तथा अन्य विकास खण्ड का दबाव बनाया जाता है। सचिवों का कहना है कि इस तरह की कार्यशैली से पंचायतों में पारदर्शिता और शासन की मंशा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
सचिवों के अनुसार, लगातार दबाव और कथित उत्पीड़न से परेशान होकर उन्होंने जनवरी माह में सामूहिक अवकाश लिया था, जिसकी विधिवत सूचना दी गई थी। इसके बावजूद जनवरी माह का वेतन रोक दिया गया। वहीं, अवकाश अवधि में भी कार्य कराने और पत्राचार जारी रखने का दबाव बनाए जाने की बात कही गई है।
इसके अलावा, वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में बिना स्वीकृत कार्ययोजना के लाइब्रेरी और खेल मैदान जैसे कार्य कराने का दबाव डाला जा रहा है, जबकि इनके भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं है। सचिवों का कहना है कि भुगतान न होने की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर डाली जा रही है।
ग्राम पंचायत सचिवों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार करने को मजबूर होंगे

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