फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। कंपिल में महाशिवरात्रि के अवसर पर प्राचीन श्री रामेश्वर नाथ, कालेश्वर नाथ मंदिर, कपिल मुनि आश्रम, वर खंडी नाथ और श्री गंगेश्वर नाथ मंदिर में शनिवार को देर शाम तक तैयारियां चलती रहीं। महाशिवरात्रि पर भक्तों की यहां भारी भीड़ उमडऩे की प्रबल संभावना है।
शनिवार सुबह से ही भक्त कांवड़ सजाकर गंगाजल भरने के लिए कंपिल घाट एवं अटैना घाट पर पहुंचने लगे। मंदिर के महंत आनंद गिरि महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि आत्मशुद्धि और भक्ति का विशेष पर्व है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष इंतजाम किए जाते हैं। आयोजनों में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि की रात में शिव-पार्वती विवाह का आयोजन होगा। कंपिल स्थित रामेश्वर नाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग का पौराणिक महत्व है। मान्यता है कि यह वही त्र्यम्बक नामक शिवलिंग है जिसकी पूजा कर कुबेर धनाधीश बने थे। बाद में रावण इसे पुष्पक विमान के साथ लंका ले गया और चंडीश्वर के नाम से इसकी पूजा कर त्रिलोक विजेता बना। लंका प्रवास के दौरान माता सीता अशोक वन में इसी शिवलिंग की पूजा करती थीं। लंका विजय के बाद भगवान राम इसे अयोध्या लाए थे। उन्होंने अपने अनुज शत्रुघ्न को मथुरा में लवणासुर का वध करने जाते समय इस शिवलिंग को पवित्र स्थल पर स्थापित करने के लिए दिया था। शत्रुघ्न ने गंगा तट कंपिल में इस शिवलिंग को स्थापित किया। जिससे इसे उपज्योतिर्लिंग की मान्यता मिली। सेतुबंध रामेश्वरम में स्थापित शिवलिंग के बाद इसके पूजन का महत्व दूसरे स्थान पर माना जाता है। महंत आनंद गिरि महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि पर रामेश्वर नाथ मंदिर में सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमडऩे की उम्मीद है। थानाध्यक्ष नितिन कुमार ने त्यौहार के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही है।
महाशिवरात्रि को लेकर प्राचीन रामेश्वरनाथ मंदिर में चलती रहीं तैयारियां
