समृद्धि न्यूज। साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगाए जो रिंग ऑफ फायर के रूप में दिखाई देगा और अंटार्कटिका सहित दक्षिणी गोलार्ध में लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक अद्भुत नजारा पेश करेगा। हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय को सूतक काल कहा जाता है, साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगने जा रहा है। जिसे आध्यात्मिक रूप से एक अशुद्ध और नकारात्मक समय माना जाता है। ग्रहण के दौरान राहु और केतु के प्रभाव से सूर्य की किरणों में नकारात्मकता बढ़ जाती है। जिसका असर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर भी पड़ता है। यही कारण है कि इस समय मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भगवान की पूजा पूरी तरह रोक दी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, यह समय बाहरी पूजा का नहीं बल्कि मानसिक शांति और आत्मां की शुद्धि का होता है। भारत में यह सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देखा। ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार, सूर्यदेव के संसार की आत्मा और ऊर्जा का मुख्य कारण माना गया है। जब ग्रहण लगता है, तो सूर्यदेव पीड़ित अवस्था में होते हैं और ब्रह्मांड में अंधकार व नकारात्मक ऊर्जा का संचालन होने लगता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार भगवान की मूर्तियां इस नकारात्मक ऊर्जा को सोख सकती हैं। जिससे उनकी पवित्रता प्रभावित होती है। ग्रहण के दौरान मूर्ति पूजा रोकने का उद्देश्य भगवान की ऊर्जा को सुरक्षित रखना माना गया है। इस समय को विश्राम काल की तरह देखा जाता है ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे। खगोलीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण भारतीय समयानुसार मंगलवार दोपहर लगभग 12:31 बजे अपने चरम पर होगा। यह अंटार्कटिका जैसे क्षेत्रों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। इस दौरान रिंग ऑफ फायर का अद्भुत दृश्य लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक बना रहेगा। ग्रहण की शुरुआत वैश्विक समयानुसार (यूटीसी) सुबह 09:56 बजे होगी। यह मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के देशों के लिए अनुकूल है। 17 फरवरी के रिंग ऑफ फायर के बाद 12 अगस्त 2026 को दुनिया एक पूर्ण सूर्य ग्रहण देखेगी। यह एक दुर्लभ अवसर होगा जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढंक लेगा। इससे प्रभावित क्षेत्रों में कुछ मिनटों के लिए दिन, रात में बदल जाएगा। हालांकि, ग्रहण में मूर्ति पूजा वर्जित है, लेकिन मानसिक रूप से मंत्रों का उच्चारण करना करोड़ों गुना अधिक फलदायी माना गया है। इस समय किया गया ”ॐ नमः शिवाय” या गायत्री मंत्र का मानसिक जाप सीधे भगवान तक पहुंचता है और भक्त के आसपास एक सुरक्षा कवच बनाता है।
