
समृद्धि न्यूज़ अयोध्या।उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशानिर्देशन तथा जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष गौरव कुमार श्रीवास्तव के मार्ग दर्शन में बुधवार को राजकीय संप्रेक्षण गृह किशोर,राजकीय महिला शरणालय और शक्ति सदन (स्वाधार गृह) का निरीक्षण किया गया।यह निरीक्षण आश्रय गृह निरीक्षण समिति की सदस्य अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नूरी अंसार,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव शैलेंद्र सिंह यादव व प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड सुश्री साक्षी सिंह द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
निरीक्षण के दौरान राजकीय संप्रेक्षण गृह किशोर में साफ सफाई उचित नही पायी गयी, जिससे बीमारियों की बढ़ने की आशंका है।इस संबंध में दायित्वधीन कर्मचारियों को साफ सफाई की व्यवस्था कराने के लिए निर्देशित किया गया।संस्था में लगे तीनों ए०सी० कार्यरत नही मिले।इस संबंध में संस्था में उपस्थित केयर टेकर को निर्देशित किया गया कि तत्काल ए०सी० ठीक कराये जाने हेतु पत्राचार किए जाने का निर्देश दिया गया। इस क्रम में महिला शरणालय अयोध्या में साफ सफाई संतोषजनक पायी गयी, अधीक्षिका द्वारा अवगत कराया गया कि समय समय पर चिकित्सक द्वारा मानसिक रूप से बीमार संवासिनियों को दवाई दी जा रही है।महिला शरणालय की अधीक्षिका को सभी संवासिनियों की काउन्सिंलिग कराने तथा विभिन्न सर्वांगीण विकास हेतु गतिविधियाँ कराने का निर्देश दिया गया जिससे उनका सम्पूर्ण विकास हो सके।समिति द्वारा संस्था की साफ सफाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देशित किया गया कि बारिश के मौसम में सीलन की समस्या न हो,संस्था के साफ सफाई पर विशेष ध्यान दे एवं पूर्ण स्वच्छता बरती जाए।निरीक्षण समिति द्वारा सभी किशोर/किशोरियों को समझाया गया कि सभी आपस में मिलजुल कर रहे।सचिव द्वारा किशोर को विधिक जानकारी प्रदान की गयी एवं बताया गया कि यदि किसी अपचारी किशोर के पास अधिवक्ता की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अपने मुकदमे की पैरवी हेतु निःशुल्क अधिवक्ता/लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल की सुविधा प्रदान की जाती है जिससे किसी अपचारी किशोर को कोई समस्या हो तो वह लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।इस दौरान सचिव द्वारा अधीक्षक जिला कारागार को बन्दियों के बौद्धिक विकास हेतु उनको मोटिवेट किए जाने के लिए निर्देशित किया गया जिससे सभी बन्दी मानसिक तौर पर विकसित होकर देश विकास के मुख्य धारा में अपना योगदान प्रदान करें।इस बीच कोई ऐसा बन्दी नही पाया गया जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम हो।शिविर में असिटेन्ट लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल सिस्टम को निर्देशित किया गया कि ऐसे बन्दी जिनकी न्यायालय द्वारा जमानत हो चुकी है किन्तु जिला कारागार से रिहा नही हो पाये है,उनकी रिहाई के लिए व्यक्तिगत रूप में एवं थाने के माध्यम से आर्थिक,सामाजिक एवं सम्पत्तियों की जाँच आख्या प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें, जिससे उनको जेल से रिहाई के लिए आवश्यक कार्यवाही किया जा सके।शिविर में किशोर बन्दियों के व्यक्तिगत साफ सफाई पर नाराजगी व्यक्त की गयी तथा अधीक्षक को बन्दियों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देने के साथ ही साथ ऐसे बन्दी जो अपना जुर्म स्वीकार करना चाहते हैं,उनके प्रार्थना पत्र सम्बन्धित न्यायालय के माध्यम से जेल लोक अदालत में निस्तारित कराये जाने के लिए निर्देशित किया गया।इसी क्रम मे सचिव द्वारा जिला कारागार में विधिक जागरूकता शिविर भी लगाया गया,जिसमें जेल में निरूद्ध बन्दियों को विधिक जानकारी प्रदान की गयी तथा बन्दियों को उनके अधिकारों के बारे अवगत कराया गया।साथ ही साथ सभी बैरकों के बन्दियों को बुलाकर समझाया गया कि यदि कोई नया बन्दी जिला कारागार में आता है कि तो उससे उसके पैरवी के लिए अधिवक्ता है या नही इसकी विशेष जानकारी ली जाये कि उसके पास अधिवक्ता की सुविधा है या नही?यदि किसी बन्दी के पास अधिवक्ता की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा के माध्यम से एल.ए.डी.सी.एस (लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल सिस्टम) मुकदमे की पैरवी हेतु निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा प्रदान की जाती है।जेल में लीगल एड क्लीनिक की स्थापना की गयी है जिससे किसी बन्दी को कोई समस्या हो तो वह जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।
