
स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण से अवैध अस्पताल व क्लीनिकों का अंबार
कमालगंज, समृद्धि न्यूज। झोलाछाप के इलाज से बालिका की हालत बिगडऩे गई। परिजनों के कहने पर सभी को अपनी दुकान से भगा दिया। दूसरी जगह चिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर उसने यह कहकर इलाज करने से मना कर दिया कि फर्रुखाबाद किसी बड़े अस्पताल में दिखाओ। परिजन लाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उसकी मौत हो गई। इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया।
जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम दिनारपुर निवासी बलवीर वर्मा की 10 वर्षीय पुत्री उर्मिला जो की प्राइमरी विद्यालय में कक्षा 6 की छात्रा थी। बुधवार को अचानक उसकी तबीयत बिगडऩे से दिनारपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित नूर मेडिकल पर परिजन लेकर पहुंचे। जहां मौजूद उबैदुल्लाह ने अपने आपको को फार्मासिस्ट बताते हुए उसे भर्ती कर उसका उपचार शुरु कर दिया। कई बोतले चढऩे के बाद भी उसे आराम नहीं मिला। उसकी हालत और खराब हो गई। जब परिजनों ने आपत्ति की तो उसने सभी को अपनी दुकान से बाहर निकाल दिया और कहा कि मैं कुछ नहीं कर सकता है। दूसरी जगह दिखाओ। परिजन कमालगंज स्थित एक निजी नर्सिंग होम में लेकर पहुंचे। जहां हालत गंभीर देख चिकित्सक ने फर्रुखाबाद या फतेहगढ़ ले जाने की सलाह दी। परिजन तैयारी कर रहे थे, तभी उसकी मौत हो गई। एक चिकित्सक के अनुसार पैसा एठने के चक्कर में मात्रा से अधिक बोतल चढ़ा देने से फेफड़ों में बालिका के पानी भर जाने से ऐसा हुआ है। इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने उपचार करने वाले युवक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्यवाही करने की बात कहीं। बताते चले कि इससे पूर्व झोलाछापा लोगों के खिलाफ छापामारी कर अभियान चलाकर कार्यवाही करने की बात सीएमओ ने कही थी, लेकिन खाऊ कमाऊ नीति के चलते अवैध अस्पलाओं व क्लीनिकों की जिले में बाढ़ सी आ गयी है। चिकित्सक की डिग्री लगाकर अस्पताल खोल लेते है, लेकिन इलाज मरीजों का अनाड़ी लोग करते है। अब तक लगभग २० लोगों की झोलाछाप के इलाज से मौत हो चुकी है। उसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कान पर जूं नहीं रेंग रही। इनके आगे सरकार के सभी आदेश बेअसर है। घटना के बाद से मेडिकल स्टोर संचालक बंद कर फरार हो गया।
