हमारे देश की आधी आबादी महिला वर्ग से गिनी जाती है: डा0 शालिनी

मिशन शक्ति फोर के तहत सेमिनार का हुआ आयोजन
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मान्यवर कांशीराम राजकीय महाविद्यालय निनौआ में प्राचार्य डॉ0 शालिनी के संरक्षण में राष्ट्रीय सेवा योजना के अन्तर्गत मिशन शक्ति समिति द्वारा मिशन शक्ति फेज-4 के तहत नारी सुरक्षा, नारी स्वाभिमान एवं नारी स्वावलंबन विषय पर एक सेमिनार का आयोजन सरस्वती वंदना एवं स्वागत गान के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एन0ए0के0पी0 महाविद्यालय की डॉ0 श्वेता सिंह ने विचार व्यक्त हुए कहा कि नारी सशक्तिकरण के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट कानून के विषय में विस्तार से छात्राओं को जानकारियां देते हुए जागरुक किया। उन्होंने कहा कि हमारे शिक्षा के क्षेत्र में छोटी-छोटी बच्चियों को गुड टच और बेड टच के बारे में इसीलिए शिक्षा दी जा रही है कि बच्चे छोटे हैं, अपनी बात को सही ढंग से कह सके और सही ढंग से समझा सकंे। बच्चों की मानसिक स्थिति बहुत ही नाजुक और मर्मस्पर्शी होती हैं। इस पर गलत ढंग से अंकित छाप न सिर्फ एक जीवन को खराब करती है, बल्कि समाज में भी गलत संदेश प्रेषित करती है। विशिष्ठ अतिथि डी0एन0पी0जी0 कॉलेज से डॉ0 प्रज्ञा त्रिपाठी ने महिला सशक्तिकरण पर कहा कि आज नारी पहले से ज्यादा सशक्त हो चुकी है, किन्तु पूर्ण रूप से उसका प्रतिनिधित्व का प्रत्येक क्षेत्र में अभाव है। उन्होंने कहा कि दहेज निषेध अधिनियम 1961, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ उत्पीडऩ, मुक्त कानून का अधिकार, महिला आरोपी शाम 6 बजे से सुबह 6 गिरफ्तारी नहीं, पहचान की रक्षा करने के लिए अधिकार है। तथा महिला सिर्फ अकेले में डिस्टिक्ट मजिस्टेट के सामने अपने बयान दर्ज कर सकती है और जीरो एफ0आई0आर0 का भी अधिकार रखती है। इन सबके साथ ही डरे नहीं सहे नहीं 1090, वीमेन हेल्पलाइन 181 तथा 182 आदि नंबरों की भी उपयोगिता पर विस्तार से समझाया। इस बात पर भी जोर दिया कि चुप्पी तोड़ो खुलकर बोलो, का अर्थ समझे और अपने ज्ञान का विस्तार करें। प्राचार्य डॉ0 शालिनी ने पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था पर विचार रखें। स्त्री की स्वतंत्रता और स्वावलंबिता समाज के लिए अभिशाप नहीं बल्कि समाज को मजबूत बनाने में सहयोगी हो सकती है। हमारे देश की आधी आबादी महिला वर्ग से गिनी जाती है। किसी भी समाज की प्रगति उस समाज की महिलाओं के शिक्षित होने से समाज की दृढता से आंकी जा सकती और उन्नति का मूल मैं शिक्षा शिक्षा को मानती हूं। प्राध्यापक डा0 अनुपम अवस्थी ने आदिकाल से वर्तमान काल तक की महिला प्रगति यात्रा पर अपने विचार व्यक्त किये। प्राध्यापक महेश ने भी महिलाओं की पुस्तकों में बंद स्थिति और तत्कालीन परिवेश की स्थिति और समयानुरूप हुए परिवर्तनों परअपने विचार प्रस्तुत किए। संचालन करते हुए डॉ0 सुंदरलाल ने बीच-बीच में अपनी तथ्यात्मक जानकारी से बाबा साहब डॉ0 भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपने विचार दिए। हिंदू कोड बिल की महत्वता महिलाओं के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, इस विषय पर अपने विचार रखे। छात्र/छात्राओं की तरफ से छात्रा अमृता सिंह ने नारी सशक्ति पर अपने विचार रखें एवं आंकड़ों के साथ छात्र मधुसूदन ने भी तथ्यात्मक जानकारी प्रेषित की। सेमिनार मिशन शक्ति फेज-4 के अन्तर्गत डॉ0 अनामिका सक्सेना द्वारा किया गया। इस अवसर पर समस्त प्राध्यापक एवं छात्र/छात्राओं में सूर्यकांत, राज, अमृता, शिखा, ज्योति, पूजा, बबली, शिवानी, गौरी, अंशी, रोशनी, मधुसूदन के अलावा किशन पाल, राजेश, सुरेश आदि मौजूद रहे।

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