
श्राप से पत्थर की बनी माता अहिल्या को प्रभु ने दी मुक्ति
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। पाण्डेश्वरनाथ मंदिर में चल रही श्री रामकथा के पंचम दिवस आचार्य अम्बरीश महाराज के द्वारा भगवान राम के बाल लीलाओं की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि प्रभु इतने सुंदर है कि जो देखता है वह सब काम-धाम भूलकर प्रभु की बाल सुलभ लीलाओं ऐसा वस जाता है कि उसको यह ध्यान ही नहीं रहता कि हमको कुछ करना भी है। महाराज दशरथ भी सब कुछ भूलकर प्रभु की बाल लीलाओं का आनंद की अनुभूति पाकर अपने को धन्य समझ रहे है। पूरी अयोध्या में एक अलग प्रकार का उल्लास है, चारो ओर खुशी ही खुशी दिखाई देती है। प्रभु श्रीराम व चारों भाइयों सहित अयोध्या महल में वापस आते है तो फिर से अयोध्या और महल में चारों ओर हर्ष का वातावरण हो जाता है। हर कोई राम का दिवाना है, किसी न किसी बहाने से उनके पास रहना व उनके पास जाना चाहता है। कुछ समय पश्चात ऋषि विश्वामित्र अयोध्या महाराज दरशथ के पास आते है और बताते है कि इस समय राक्षसों के आतंक के कारण हवन, पूजा पाठ में बाधायें उत्पन्न हो रही है। राक्षसों का वध होना आवश्यक है। राक्षस सब प्रकार के धर्म-कर्म के कार्यों को बंद कराने पर अमादा है, इसलिए राम को मेरे साथ भेज दीजिए। महाराज दशरथ राम जी को को विश्वामित्र के साथ में राम को अधूरे मन से भेजने की हामी भर देते है। राम के विश्वामित्र के साथ जाने की बात सुनकर लक्ष्मण जी भी साथ में जाने की जिद करते है और वह भी प्रभु के साथ यज्ञ और धार्मिक कार्यों की रक्षा करने के लिए विश्वामित्र के साथ चल पड़ते है। आचार्य अम्बरीश महाराज कहते है कि जबसे प्रभु श्रीराम विश्वामित्र के आश्रम पर पहुंच जाते है तब से ऋषि-मुनि आदि आराम से यज्ञ, हवन आदि करने लगते है, जब राक्षसों को पता चलता है ऋषि लोगों ने फिर से हवन चालू कर दिया है तो वह हवन को भंग करने के लिए आते है और हवन को खंडित करने की कोशिश करते है। प्रभु श्रीराम जी यज्ञ की रक्षा करते है, सुवाहु, ताडक़ा न जाने कितने आसुरों का प्रभु श्रीराम उनका संघार करते है। जिसके बाद ऋषि मुनि आराम से यज्ञ आदि करते है। जब विश्वामित्र देख लेते कि अब राक्षसों का आतंक समाप्त हो चुका है तो वह प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण को लेकर महाराज जनक के बुलावे पर मिथला के लिए चल पड़ते है। जहां पर गौतम ऋषि की पत्नी उनके श्राप के कारण से पत्थर की शिला में तब्दील हो जाती है। विश्वामित्र प्रभु श्रीराम से कहते है कि राम तुम्हारे ही इंतजार में माता अहिल्या पत्थर की शिला बनी है, इनकों श्राप से मुक्ति दो। प्रभु श्रीराम अपने पैरों को जैसे ही शिला में छुआते है पत्थर की शिला से माता अहिल्या निकलती है और प्रभु श्रीराम उनको प्रणाम करते है। श्रीराम कथा के मुख्य यजमान अनिल पाठक व उनकी पत्नी केसर पाठक रही। उन्होंने व्यास गद्दी की पूजा की। व्यवस्थाक कोमल पाण्डेय, सतीश प्रकाश दीक्षित, राम बिहारी अग्निहोत्री, आलोक मिश्रा, मनोज दीक्षित, मोहित खन्ना, दीपक पाल, रज्जू गुप्ता, अतुल गुप्ता, विवेक शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
