दोनों गौशालाओं में कुल 443 मिले गौवंश, पशुओं का टीकाकरण कराने के दिये निर्देश
गोबर से पेंट बनाने के सम्बन्ध में योजना तैयार करने के भी सीवीओ को दिये निर्देश
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। विशेष सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश/गौ संरक्षण अभियान के जनपद के नोडल अधिकारी द्वारा आज दोपहर 1.30 बजे कान्हा गौशाला कमालगंज का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के समय मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, परियोजना निदेशक जिला ग्राम विकास अभिकरण, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत कमालगंज, खंड विकास अधिकारी कमालगंज एवं नायब तहसीलदार सदर उपस्थित रहे। कान्हा गौशाला में 286 गोवंश बताए गए। गौशाला में न पशुओं को छोटे पशुओं से अलग रखा गया है तथा सभी पशुओं का टीकाकरण कराया गया है। इसके अतिरिक्त पूर्व में पशुओं को लंपी डिजीज के टीके लगाए गए हैं। गौशाला में 5 केयर टेकर कार्य कर रहे हैं। जनपद के नोडल अधिकारी शिवसहाय अवस्थी द्वारा जनपद में अभियान के दौरान पकड़े गए गौवंशों की जानकारी की गई तथा वर्तमान समय में जनपद की गौशालाओं में संरक्षित गोवंश की जानकारी की गई है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा बताया गया कि अभियान के दौरान लगभग 4500 गौवंशों का संरक्षण कराया गया है तथा जनपद की गौशालाओं में लगभग 13000 गौवंश संरक्षित हैं। नोडल अधिकारी द्वारा उपस्थित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि जनपद में नस्ल सुधार अभियान चलाया जाए तथा जिन गोवंशों की मृत्यु हो जाती है उनका डेथ ऑडिट कराकर रजिस्टर में दर्ज कराया जाए। साथ ही गोबर से पेंट बनाने के सम्बंध में योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए गए।

इसके अलावा नोडल अधिकारी द्वारा अपराह्न 3.00 बजे गौवंश आश्रय स्थल याकूतगंज का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, खंड विकास अधिकारी बढ़पुर, सहायक विकास अधिकारी पंचायत, पशु चिकित्सा अधिकारी एवं ग्राम सचिव उपस्थित रहे। निरीक्षण के समय गौशाला में गोवंशों की संख्या 157 बताई गई। जिनकी गिनती कराने पर 157 गोवंश पाए गए। उपास्थित पशु चिकित्सा अधिकारी से ईयर टेगिंग व टीकाकरण की जानकारी करने पर पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा बताया गया की अभियान के दौरान पकड़े गए 3-4 गौवंशों को छोडक़र सभी की ईयर टेकिंग कराई गई है। नए गौवंश को छोडक़र समस्त गौवंशों का टीकाकरण करा दिया गया है। गौशाला में चारा, भूसा, पानी इत्यादि की व्यवस्था ठीक पाई गई तथा अभिलेखों की जानकारी करने पर समस्त अभिलेख पाए गए। मृतक गोवंशों का डेथ ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए। जिस पर पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा बताया गया कि पशुओं का डेथ ऑडिट कर रजिस्टर में दर्ज कराया कराया जाता है। डेथ ऑडिट रजिस्टर नोडल अधिकारी को दिखाया गया।
