16 जनवरी से शुरू होकर 21 जनवरी तक चलेगा समारोह का पूजन कार्यक्रम
अमिताभ श्रीवास्तव।
समृद्धि न्यूज़ अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा प्राण प्रतिष्ठा समारोह कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है।इसे लेकर रविवार को आयोजित की गई प्रेस वार्ता के दौरान इस बारे में जानकारी देते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महामंत्री चंपत राय ने बताया कि आगामी पौष शुक्ल पूर्व द्वादशी विक्रम संवत 2080 तदानुसार आगामी 22 जनवरी को भगवान श्री राम लला के श्री विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का पवित्रं योग आ गया है।सभी शास्त्रीय विधि का पालन करते हुए प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम मध्यान्ह अभिजीत मुहूर्त में होगा।प्राण प्रतिष्ठा की विधि 16 जनवरी से प्रारंभ होकर 21 जनवरी तक चलेगी।इसमें 16 जनवरी को प्रायश्चित एवं कर्म कुटी पूजन,17 जनवरी को मूर्ति का परिसर प्रवेश,18 जनवरी सायंकाल तीर्थ पूजन एवं जल यात्रा जलाधिवास एवं गंधाधिवास,19 जनवरी प्रातः औषधाधिवास,केशराधावास, घृताधिवास,सायंकाल धन्याधिवास,20 जनवरी प्रातः शर्कराधिवास,फलाधिवास एवं सायंकाल पुष्पाधिवास,21 जनवरी प्रातः मध्याधिवास सायं काल शैययाधिवास,इस प्रकार द्वादश अधिवास होंगे। सामान्यतया प्राण प्रतिष्ठा में सप्त अधिवास होते हैं,इसमें न्यूनतम तीन अधिवास चलन में है।उन्होंने बताया कि अनुष्ठान में 121 आचार्य होंगे।अनुष्ठान के संयोजक गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ एवं मुख्य आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित काशी के होंगे।प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,राष्ट्रीय स्वयं संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य विशिष्ट जनों की उपस्थिति में संपन्न होगा।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर प्रांगण में प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी बनने के लिए देश की सभी आध्यात्मिक धार्मिक मत,पंथ,संप्रदाय तथा उपासना पद्धतियों के सभी अखाड़ों,परंपराओं,संप्रदायों के आचार्य 150 से अधिक परंपराओं के संत,महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर,श्री महंत,महंत,नागा साथ ही 50 से अधिक आदिवासी गिरीवासी,तटवासी,द्वीपवासी तथा जनजाति परंपराओं की उपस्थिति भारतवर्ष के निकटवर्ती इतिहास में पहली बार हो रही है, यह अपने आप में विशिष्ट होगा। उन्होंने बताया कि सम्मिलित होने वाली परंपराओं में शैव,वैष्णव, शाक्त,गणपत्य,पत्य,सिख,बौद्ध, जैन,दशनाम,शंकर,रामानंद, रामानुज,निंबार्क,मद्धव,विष्णु नामी,रामसनेही घीसापंथ, गरीबदासी,गौड़ीय,कबीरपंथी, वाल्मीकि,असम की शंकर देव, माधव देव,इस्कॉन,रामकृष्ण मिशन चिन्मय मिशन,भारत सेवा आश्रम,संघ,गायत्री परिवार अनुकुलचंद्र,ठाकुर परंपरा,उड़ीसा का महिमा समाज,पंजाब से अकाली,निरंकारी,नामधारी,राधा स्वामी तथा स्वामीनारायण, वारकरी,वीर शैव आदि हैं।गर्भ गृह में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद सभी साक्षीगण क्रमशः दर्शन करेंगे।उन्होंने बताया कि श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का उत्साह सर्वत्र अनुभव हो रहा है।अयोध्या सहित संपूर्ण भारतवर्ष में उत्सव को भव्यता से मनाने का संकल्प ले लिया है।इस अवसर पर भिन्न-भिन्न प्रदेशों के जल,मिट्टी,स्वर्ण,रजत,रत्न,वस्त्र, आभूषण,विशाल घंटा,नगाड़ा और भिन्न-भिन्न प्रकार की सुगंधी लेकर निरंतर लोग आते ही जा रहे हैं जिसमें सर्वाधिक उल्लेखनीय है मां जानकी के मायके जनकपुर और सीतामढ़ी से भार लेकर बड़ी मात्रा में लोग उपस्थित हुए।साथ ही भगवान के ननिहाल रायपुर दंडकारण्य क्षेत्र से भिन्न भिन्न प्रकार के आभूषण समर्पित किए हैं।उन्होंने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र भारत के सभी बंधु भगिनियों से आह्वान करता है कि 22 जनवरी को जिस समय अयोध्या में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा हो रही हो,उस समय अपने आसपास के मंदिरों में सजावट करें और मंदिरों के देवता की उपासना के अनुरूप भजन, पूजन,कीरती और आरती करें। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संचार माध्यम से स्क्रीन लगाकर सामूहिक रूप से देखें।इसके पूर्व आसपास के मंदिरों की स्वच्छता का प्रयास भी करना चाहिए।22 जनवरी को सायंकाल अपने अपने घर राम ज्योति से प्रकाशित करें।बताया गया कि श्री राम जन्मभूमि पर प्रतिष्ठा समारोह की पुनीत और ऐतिहासिक अवसर पर प्रात 10 बजे से प्राण प्रतिष्ठा मुहूर्त के ठीक पहले तक लगभग दो घंटे के लिए श्री राम जन्मभूमि मंदिर में शुभ की प्रतिष्ठा की लिए मंगल ध्वनि का आयोजन किया जा रहा है।भारतीय संस्कृति की परंपरा में किसी भी शुभ कार्य अनुष्ठान पर्व के अवसर पर देवता के सम्मुख आनंद और मंगल के लिए पारंपरिक ढंग से मंगल ध्वनि का विधान रचा गया है।इसी संदर्भ में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा का यह श्री अवसर प्रत्येक भारतवासी के लिए शताब्दियों में होने वाला ऐसा गौरव का क्षण है जब हम संपूर्ण भारत के विभिन्न अंचलों और राज्यों से वहां के पारंपरिक वाद्ययों का वादन यहां श्री राम लला के सम्मुख करने जा रहे हैं।विभिन्न राज्यों के 25 प्रमुख और दुर्लभ वाद्य यंत्रों के मंगलवादन से अयोध्या में यह प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न होगा।इसे उन वाद्यों के दक्ष कलाकार प्रस्तुत करेंगे।
