इस बजट से एनपीएस कर्मचारियों को बहुत उम्मीद थी: ज्ञान प्रकाश
इस बजट से देश की स्थिति मजबूत होगी: मुकेश गुप्ता
चुनावी बजट होने के बाबजूद लोगों की आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतरा बजट: राजकिशोर
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा अंतरिम बजट पेश किया गया। जिस पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रियायें दी है। इस वर्ष का बजट खास नहीं रहा, ऐसी प्रतिक्रियायें आयी है। वहीं कुछ लोगों ने बजट को सही बताया है।

सेवानिवृत्त बैंक कर्मी/भाजपा नेता एवं व्यापार मण्ड के जिला मंत्री व मीडिया प्रभारी मुकेश गुप्ता ने बताया कि हमारे देश की वित्त मंत्री द्वारा जो अंतरिम बजट पेश किया गया। इसमें देश की कनेक्टिविटी सुधारने पर और भारत के बॉन्ड मार्केट को और अच्छी स्थिति में लाने के लिए विशेष फोकस किया गया है। इससे हमारे देश की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी और हमारे देश में टूरिज्म में भी भारी बढ़ोतरी होगी। विकसित भारत की कल्पना को साकार करने के लिए जरूरी कनेक्टिविटी सुधार के अंतर्गत रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा वरीयता देते हुए भारतीय रेलवे को ज्यादा मॉर्डिनाइज करके ग्लोबल स्टैंडर्ड पर लाना जरूरी है। इसलिए इस बजट में 40000 साधारण रेलवे बोगियों को वंदे भारत के स्टैंडर्ड में बदलने और नए शहरों में मेट्रो रेल की सुविधा बढ़ाने का कदम दोनों ही मिलकर इस कार्य में पॉजिटिव भूमिका निभाएंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 2 करोड़ और नए घर बनाने का लक्ष्य बेघर गरीबों के लिए एक वरदान साबित होगा। इस प्रकार यह अंतरिम बजट भारत की इकोनॉमी को तेज गति प्रदान करने वाला साबित होगा।

रस्तोगी इंटर कालेज के इतिहास प्रवक्ता व पेंशन बचाओ मंच के प्रदेश संयुक्त मंत्री ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि सरकार के अंतरिम बजट में सरकारी कर्मचारियों को कोई राहत नहीं दी गई है। आयकर स्लेब में कोई बदलाव नहीं किया गया। एनपीएस कर्मचारी जो बजट से बहुत उम्मीद लगाये बैठे थे कि एनपीएस में गारंटीड रिटर्न या निश्चित पेंशन की घोषणा सरकार कर सकती है, ऐसा नहीं किया गया है। कोई नई घोषणायें भी नहीं की गई है। इस प्रकार लगता है कि सरकार निश्चित ही पुन: वापसी होगी, ऐसा बजट से प्रतीत होता है।
आयकर व जीएसटी अधिवक्ता अविनाश दुबे ने बताया कि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न होने से निराशा है, लेकिन 2009 से 10 तक की अवधि के लिए 25 हजार और 2014 व 2015 अवधि तक के लिए १० हजार तक की प्रत्यक्ष मांगों को वापस लेने से काफी राहत मिलेगी।
सेंट्रल बैंक कर्मी व यूपी बैंक एम्प्लॉयज यूनियन के संयुक्त मंत्री मयंक गुप्ता ने बताया कि केंद्रीय अंतरिम बजट में वित्त मंत्री ने आवास, बॉन्ड्स मार्केट, टूरिज्म और स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों पर विशेष वरीयता दी है। भारतीय बॉन्ड्स मार्केट को ज्यादा विकसित करने से पूरे विश्व में भारत की इकोनॉमी एक अच्छे स्थान पर होगी। नए मेडिकल कालेजों की स्थापना से भारतीय जनता को अपने नजदीक ही काफी कम समय में अच्छी चिकित्सा सुविधा कम पैसों में उपलब्ध होगी। भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के द्वारा किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास भी एक प्रशंसनीय कदम है। जैसा कि यह अंतरिम बजट था, इसलिए यह पूरी उम्मीद थी कि टैक्स रेट में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। रेलवे के लिए ज्यादा बजट आवंटित करके यात्रियों को पहले से ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षा सहित रेलवे यात्रा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। वहीं उन्होंने कहा कि सरकार अगर पुरानी पेंशन बहाल करती तो कर्मचारियों के हित में उनका एक साहसी कदम होता।
क्रिश्चियन इंटर कालेज के शिक्षक व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष संतोष दुबे ने बताया कि बजट 2024-25 प्रदेश के लाखों शिक्षक तथा कर्मचारियों को सरकार से बहुत उम्मीद थी। सरकार ने इस बजट में टैक्स स्लैब के दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया और ना ही पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा की गई। हम सभी को उम्मीद थी कि कम से कम कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में निश्चित धनराशि देनी चाहिए थी, लेकिन ऐसी कोई भी घोषणा बजट में नहीं हुई। यह बजट शिक्षक कर्मचारियों के लिए संतोषजनक नहीं है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री राजकिशोर शुक्ल ने कहा कि कर्मचारियों और शिक्षकों को आयकर छूट की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन बजट से उन्हें निराशा हुई। गृहिणी सीमा, गिरिजा, ज्योति, अंजू, रश्मि, राजो, रेनू ने कहा कि बजट में मंहगाई कम नहीं हुई। तेल, घी, दालों और सब्जियों की मंहगाई के कारण रसोई का बजट मुश्किल हो रहा है। भाजपा शासित मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि प्रदेशों में गैस सिलेंडर सस्ता दिया जा रहा है। शिक्षा बहुत मंहगी है, जिससे बच्चों को पढ़ाना दूबर हो रहा है। सरकार दावा करती है जीएसटी की वसूली में जबरदस्त उछाल आ रहा है और आयकर जमा करने वालों संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई फिर भी बेरोजगारों, किसानों, कर्मचारियों और गृहणियों को बजट में निराशा हुई।
