फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मेला रामनगरिया के वैदिक क्षेत्र चरित्र निर्माण शिविर में प्रात: काल वर्षा की रिमझिम फुहारों के बीच भी यज्ञ किया गया। कल्पवासियों ने बड़ी ही श्रद्धा के साथ पवित्र यज्ञ में आहुतियां देकर सुख संवृद्धि की कामना की। आचार्य संदीप आर्य ने वैदिक ऋचाओं से यज्ञ संपन्न कराया। उन्होंने कहा कि यज्ञ मनुष्य के आत्मकल्याण का सर्वोत्तम साधन है। यज्ञमय जीवन जीकर ही मनुष्य इस भवसागर से पार हो सकता है। मुनष्य का शरीर जीवात्मा को ईश्वर की साधना के लिये प्राप्त हुआ है। परन्तु आज का मनुष्य साधना की अपेक्षा साधन की उन्नति में लगा रहता है और साधना भूल जाता है। यही मनुष्य के दु:खों का कारण है। साधना का मार्ग हमें केवल वेद के विद्वानों के सत्संग से प्राप्त हो सकता है। रामनगरिया के मेले में एक मास तक हम सभी साधना करने के उद्देश्य से कल्पवास करने आये हैं।

हमारा लक्ष्य केवल परमात्मा होना चाहिए। आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद ने हमें ईश्वर के सही स्वरूप का बोध कराया तथा संसार में ईश्वर के नाम पर फैले भ्रम को दूर किया। उन्होंने कहा परमात्मा संसार के कण-कण में विराजमान हैं। उसे किसी स्थान विशेष पर ढूढने की आवश्यकता नहीं। मध्यान्ह की सभा मे धनीराम बेधडक़, हरदेव आर्य ने इश्वर भक्ति के भजनों से भक्तिरस की धारा प्रवाहित की। कार्यक्रम में स्वामी महेन्द्रानंद, संजीवानंद, बाबा लखन गिरी, डॉ0 रामकुमार, सुरेश चंद्र वर्मा, शिशुपाल आर्य, उदयराज, राजाराम आर्य, उपासना कटियार, रत्नेश द्विवेदी, रेनू आर्या, उदिता आर्या आदि उपस्थित रहें।
