अमृतपुर, समृद्धि न्यूज। हमारे देश की आजाद हुए 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी अमृतपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम मांझा अभी तक विद्युत व्यवस्था से कोसों दूर था। बिजली न होने के कारण लोग अपनी लड़कियों की शादी यहां के लडक़ों से नहीं करते थे। जैसे तैसे लडक़ों की शादी हो भी जाती थी तो दहेज में मिला हुआ सामान एक सो पीस की तरह रखा रहता था। इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी भी राजनीतिक व प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में विद्युत व्यवस्था पहुंचाने के विषय में नहीं सोचा। 2015 में यहीं के प्राथमिक विद्यालय में एक बृजेश कुमार नाम के प्रधानाध्यापक की नियुक्ति हुई, जो उस गांव के बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हुए, क्योंकि विद्युत ना होने से बच्चों का भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा था। फिर प्रधानाध्यापक ने अपने विभाग को पत्र लिखना शुरू किया। काफी लंबे समय के बाद उस पत्र के फलस्वरुप राज्य परियोजना विभाग व बेसिक शिक्षा विभाग के अथक प्रयासों से जेई होरीलाल वर्मा के नेतृत्व में बनी टीम के द्वारा कार्य करने से गांव मांझा में लाइट पहुंच सकी। जैसे ही गांव में लाइट पहुंची वहां के ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आ रही थी। जेई होरीलाल वर्मा ने बताया है कि जिस ठेकेदार को यह कार्य दिया गया था वह कार्य को अधूरा छोडक़र भाग गया। फिर मैंने अपनी टीम को लगाकर इस कार्य को किया है। हमारा प्रयास है कि हम जल्द से जल्द इस गांव के हर घर को लाइट की रोशनी से रोशन करने का काम करेंगे।
आजादी के बाद पहली बार गांव में पहुंची लाइट
