गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में अपने श्री राम आराध्य देव को सर्वश्रेष्ठ मानव बताया

भरत भैया को उनकी छाया बनाकर कार्य किया
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। श्री राधा श्याम शक्ति मंदिर लोहई रोड में डॉ0 शिवओम अंबर द्वारा मानस के गहन चिंतन मनन अध्ययन के द्वारा गोस्वामी तुलसीदास ने श्री रामचरितमानस में सनातन धर्म के वेद शास्त्र नाना प्रकार के पुराणों से मानव जीवन के मानव मूल्यों को समाज में महाकाव्य की रचना की। उन्होंने मानस के प्रत्येक पात्र के माध्यम से सनातन धर्म का संदेश दिया। अतीत काल में समाज की दशा दिशा क्या थी, अर्थात उस काल में मानव मूल्यों की स्थापना करने का प्रयास किया, जो सामाजिक समाज के लिए प्रेरणायक स्रोत है।
द्वितीय सोपान में अयोध्या कांड में गोस्वामी तुलसीदास ने श्री रामचरितमानस में अपने श्री राम आराध्य देव को सर्वश्रेष्ठ मानव बताया तो भरत भैया को उनकी छाया बनाकर कार्य किया। मानस में अपने पत्रों के माध्यम के द्वारा भरत को आदर्श माना। उनके त्याग, तपस्या, समर्पण बैराग की भावना तो दूसरी ओर देव ऋषि नारद की दृष्टि- जेहि विधि नाथ होई हित मोरा, श्री राम करुणा के सागर हैं श्री राम साध्य है तो भारत साधन है। विश्व में पूरी दुनिया श्री राम का नाम जपती है और श्रीराम जी भरत भैया का स्मरण करते हैं। भरत सरिस राम सनेही जग जय राम राम जय जेही, श्री राम मानव जीवन के आदर्श हैं, उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतरे अर्थात प्रेरणा लें वह दया के सागर हैं उनको स्मरण मात्र से संकट के अंधकार में प्रकाश पुन्ज है अर्थात अपने भक्तों का मंगल करते हैं। अयोध्या कांड की फल श्रुति, भरत चरित्र करि नेम तुलसी जे सादर सुनहि, सीय राम पद प्रेम अवसि होई भव रस विरति॥ मंत्र का जाप करें, इसका स्मरण करें, जीवन में सफलता अवश्य मिलेगी। कार्यक्रम का वीराम महा आरती प्रसाद के साथ हुआ। मुख्य यजमान सुरेंद्र पांडेय, राजन, विजेंद्र, सुरेंद्र सफ्फड़, जितेंद्र अग्रवाल, सिगतिया इंदिरा, ललिता, गरिमा पाण्डेय, अलका पांडेय आदि मानस प्रेमियों ने आध्यात्मिक रस का आनंद लिया। कार्यक्रम का संचालन बृज किशोर सिंह किशोर ने किया। सुरेंद्र सफ्फड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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