सत्य को सत्य स्वीकार करने से विकार दूर हो जाते हैं: नानकचन्द्र

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर विशेष……………….

बुद्ध के पंचशील को मानव अपने-जीवन में उतार कर अनुसरण करें तो वह मनुष्य सुख शांति से रहेगा
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। भगवान बुद्ध का वैशाखी पूर्णिमा को जन्म हुआ, उसी दिन (ज्ञान) बोधित्व और (मृत्यु) निर्वाण प्राप्त हुआ जो अपने आप में अद्भुत है, क्योंकि एक ही दिन में विश्व में किसी मानव को आज तक प्राप्त नहीं हुआ। तथागत भगवान बुद्ध का धम्म जो पाली भाषा में आप धम्म को धर्म जानते हैं। जिसमें आडंबरवाद यानी दिखावा नहीं है, बल्कि विज्ञान पर आधारित मस्तिष्क में सत्य को सत्य मानने वाला धम्म है। उन्होंने बताया कि बुद्ध का दिया गया। पंचशील और उसकी विचारधारा पूरे विश्व के सभी देशों के संविधान में विद्यमान है जो बुद्ध के पंचशील को मानव अपने-जीवन में उतार कर अनुसरण करें तो वह मनुष्य सुख शांति से रहेगा।सामाजिक चिंतक एवं लेखक नानक चन्द्र ने बताया कि बुद्ध ने आर्यसत सिद्ध किया कि जिसमें दु:ख है तो दु:ख का कारण और उसका निवारण भी है तथा चौथा मार्ग चलने का बताया। जिसमें दो आदतों से बचने की भी बात कही है। एक कामरोग यांनी भोगविलास लालसा से दूर रहने व शरीर को ज्यादा सुख और ज्यादा कष्ट न देकर मध्यम मार्ग अपना कर मनुष्य मन को स्वस्थ रख सकता और जीवन में अच्छे बुरे का सही निर्णय ले सकता है। संसार में जो भी चीज है वह अनित्य है उदाहरण के तौर पर मोमबत्ती स्वयं जलकर प्रकाश देता है धीमे-धीमे समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार सारे संसार की रचना पदार्थ और ऊर्जा से हुई है। पहले अनुभव आया अनुभव से सीखा उसके बाद फिर वस्तु विनियम आया। पाषाण युग से पहले आडम्बर नहीं था। सत्य को सत्य स्वीकार करने से विकार दूर हो जाते हैं। यही दुख का निवारण है। उन्होनें लोगों को बुद्ध और अंबेडकर के विचारों को अपने जीवन में अनुसरण करने की सलाह दी। उन्होनें कहा कि इस दौरान बुद्ध विचारधारा का अनुसरण करता है और विचारधारा को प्रसारित करने काम करता है ऐसे अनुयाईयों को सम्मानित किया जाए तो अधिक पाल मिलेगा और समाज में वैज्ञानिक वाद की व्यवस्था मनुष्य में अपने आप स्वीकार हो जाएगी और इस तरह देश बुद्धमय में बन सकेगा और मानव-मानव एक समान के रास्ते पर चलकर प्रगतिशील बनेगा।

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