गैर इरादतन हत्या में दंपत्ति सहित तीन को पांच वर्ष का कारावास

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। गैर इरादतन हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश रितिका त्यागी ने अभियुक्त दर्शनलाल, बसंती देवी, रामरुप को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया।
विगत वर्ष 2002 में कोतवाली फतेहगढ़ के क्षेत्र नेकपुर निवासी सुदामा देवी ने पुलिस को दी तहरीर में दर्शाया था कि 30 मार्च 2002 को मेरे पति किशन पाल पुत्री रमा के साथ महेन्द्र के बैगन के खेत के पास भैंस चरा रहे थे, तभी अचानक भैंस अचानक दर्शनलाल के खेत में चली गई। भैंस को निकालने मेरे पति गये, तभी दर्शनलाल व उसकी पत्नी बसंती देवी, पुत्र रामरुप अपने मकान से निकल आये और मेरे पति को भद्दी-भद्दी गालियां देने। मेरे घर पर मेरे जेठ मदनलाल निवासी जरौरी नवादा जिला हरदोई होली मिलने आये थे। उन्हें वापस लौटने में देरी हो रही थी, तभी मैं पति को बुलाने मौके पर पहुंची, तो देखा उक्त लोग मेरे पति व पुत्री को गालियां दे रहे थे। मैने विरोध किया। इतने में दर्शनलाल मेरे पति को मारने पीटने लगे। बसंती व रामरुप ने मेरे व मेरी पुत्री पर ईंट डेला से हमला कर दिया, तभी दर्शनलाल ने मेरे पति के सिर पर खुरपी से हमला कर दिया। जिससे वह जमीन पर गिर पड़े। आरोपीगण मौके से भाग गये। इस दौरान ईंट लगने से मेरी पुत्री भी घायल हो गये। मौके पर मेरे जेठ आ गये। जिनकी मदद से पति को उपचार के लिए लोहिया अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। बचाव पक्ष व शासकीय अधिवक्ता की कुशल पैरवी के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश रितिका त्यागी ने अभियुक्त दर्शनलाल, बसंती देवी, रामरुप को दोषी करार देते धारा 304 के भाग 2 सपठित की धारा 34 में पांच-पांच वर्ष का कारावास व पचास-पचास हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। धारा 504 में अभियुक्त को एक वर्ष का साधारण कारावास व एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियुक्त बसंती व रामरुप को धारा 323 के आरोप में छह-छह माह का साधारण कारावास व पांच-पांच सौ रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियुक्तगण द्वारा पूर्व में कारागार में बितायी गई अवधि को सजा में समाहित की जायेगी।

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