लोहिया अस्पताल के कर्मचारियों को नहीं है किसी का डर

टूटे बेड पर लेटे मरीज, चादर भी नहीं हो रही नसीब
मुख्यमंत्री से लेकर डिप्टी सीएम कर चुके है निरीक्षण
डीएम और सीएमओ ने तो किया अनेको बार निरीक्षण, मिली खामियां, पर आज तक नहीं हुई कोई कार्यवाही
सांसद, विधायक को नहीं दिखायी देता मरीजों का दर्द
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। तापमान में हो रही बढ़ोतरी से जिला अस्पताल लोहिया में मरीजों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। मरीजों को टूटे बेड पर लिटाया जा रहा है। यही नहीं उन्हें चादर भी नहीं मिल पा रही है। शुक्रवार को भर्ती मरीजों की संख्या बढक़र 145 तक पहुंच गई है। ऐसे में बर्न वार्ड में भी सामान्य मरीजों को भेजना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी हो गई है। गर्मी का मौसम बढ़ते ही खांसी, जुकाम, बुखार के साथ उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गुरुवार को लोहिया अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 131 थी, जबकि शुक्रवार को 145 पहुंच गई है। बढ़ते मरीजों के चलते व्यवस्थाएं भी ध्वस्त होती दिख रही हैं। अस्पताल में जनरल एफ.7 वार्ड का 36 नंबर बेड टूटा हुआ है। बेड के नीचे एक स्टूल लगाने के बाद मरीज को लिटाया गया है।
18 मई को कोतवाली मोहम्मदाबाद के गांव दाउदपुर नंदसा निवासी आर्येंद्र देवी को नेत्र रोग वार्ड नम्बर १८ में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि उन्हें अभी तक बेडशीट भी नहीं मिली है। बिना बेडशीट के ही गद्दे पर ज्यादा गर्मी लग रही है। मारपीट के बाद घायलावस्था में भर्ती कराया गया था।
इसी वार्ड में थान कम्पिल क्षेत्र के गांव जिजौटा पहाड़़पुर निवासी पूजा भर्ती है। उनका कहना है कि वह ऑपरेशन कराने के बाद सोमवार को भर्ती हुई थी। उन्हें अभी तक चादर नहीं दी गई है। इलाज करवाना मेरी मजबूरी है। कई बार कहने के बावजूद भी किसी ने सुनवाई नहीं की है। 5 वार्डों में कूलर भी नही लगे है। गर्मी और उमस की बजह से मरीज उबल रहे है। जल्द स्वस्थ्य होने की बजाय गर्मी की बजह से और उन्हे दिक्कत हो रही है।
सीएमएस डॉक्टर अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि सुबह ही सभी वार्डों का राउंड लेते है। जहां भी कोई दिक्कत दिखती है। वहां नोटिंग करके संबंधित पटलों को समस्या समाधान के लिए लिखते हैं। तय समय सीमा में दोबारा निरीक्षण करेंगे। यदि बेड टूटा है। तो बदला जाएगा और चादरें भी सभी मरीजों को मिलेंगी। अगर कोई कर्मचारी अपनी ड्यूटी ईमानदारी से नहीं कर रहा है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जायेगी। बताते चले कि लोहिया अस्पताल का जो यह हाल है यह पहली बार नहीं है। इस अस्पताल का प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा डिप्टी सीएम ३ बार निरीक्षण कर चुके है।
इसके अलावा जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी ने तो अनेकों बार निरीक्षण किया और निरीक्षण में एक नहीं अनगिनत खामियां मिली। जिस पर निरीक्षण करने वालों ने एक ही बात कही दोषी लोगों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी, लेकिन ढांक के तीन पाक जैसी कहावत साबित हो रही है। जिन लोगों के जिम्मे लोहिया अस्पताल की जिम्मेदारी है उन लोगों के काम चोरी करने पर कोई कार्यवाही न होने से उनके हौसले बुलंद है। इसलिए तो उन्हें न तो सरकार का और न ही विभागीय अधिकारी का डर है। अब ऐसे में यदि पब्लिक का आदमी अपने हक के लिए आवाज उठाता है तो सभी कर्मचारी मिलकर उसके खिलाफ हड़ताल की धमकी देकर जिले के अधिकारियों को दबा लेते है। ऐसे में दोषियों पर तो कार्यवाही नहीं होती, लेकिन जो अपने हक की आवाज उठाता है तो उस पर चिकित्सकों के साथ अभद्रता व सरकारी कार्य में बाधा डालने का पुलिस मुकदमा दर्ज कर लेती है। इसलिए जन प्रतिनिधि से लेकर पब्लिक का कोई भी व्यक्ति इनके खिलाफ खड़ा होने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है।

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