तुलसीदास ने मानस के महाकाव्य में सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति का मूल ग्रंथ माना
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। श्री राधा शक्ति श्याम मंदिर लोहई रोड में श्री रामचरितमानस के कथा विराम दिवस पर डा0 शिवओम अम्बर के गहन अध्ययन चिंतन के तात्विक विमोचन में गोस्वामी तुलसीदास ने मानस के महाकाव्य में सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति का मूल ग्रंथ माना। जिसमें वेदों की सूक्तियां नाना प्रकार के पुराण, शास्त्र, उपनिषदों की व्याख्या सरल हिंदी में की। सप्तम सोपान उत्तर काण्ड में श्रीलंका की विजय यात्रा, श्री राम जी का राजभिषेक, स्वास्तिक वचन मंगलाचरण, देवताओं की स्तुति गुरुजनों एवं संतों का सम्मान श्री राम द्वारा अपनी प्रजा को उपदेश, वनवासियों, नर नारी, बंदरो की विदाई, पुत्रों उत्पत्ति और अपने समय के अनुसार पूर्व जन्मों के अनुसार परमधाम को जाना, श्री रामचरितमानस के ग्रंथ में गूढ तत्वो का विमोचन किया। उत्तर काण्ड के सप्तम सोपान के फल श्रुति कलयुग में जो व्यक्ति श्रीरामचरितमानस का स्वाध्याय पाठ करता है। उसके जीवन के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह पवित्र पावन ग्रंथ सदा कल्याणकारी, मंगलकारी, ज्ञान विज्ञान, अध्याय ईश्वर की भक्ति देने वाला, मोह माया, क्रोध, लोभ, ईष्या का नाश करता है। परम निर्मल प्रेम रूपी जल से परपूर्ण तथा मंगलकारी है। संसार रूपी भव सागर में सूर्य के प्रचंड तप से जलते नहीं है। अर्थात परब्रहम श्री राम जी के कृपा पात्र बन जाते हैं अर्थात सदैव उनके कल्याण हो जाता है।
उत्तर काण्ड कि यह फल श्रुति मानस के अंतिम चौपाई में इसका वर्णन मिलता है। डॉ0 शिवओम अंबर को राम भक्तों, श्रोताओ ने पुष्माला स्मृति चिन्ह अंग वस्त्र से सम्मानित किया। आयोजन समिति ने भक्तों को जीवन में स्वयं चिंतन मनन के लिए रामचरितमानस को भेंट किया। सभी के मंगल में जीवन की कामना के साथ भगवान की श्यन आरती एवं प्रसाद वितण के साथ मानस की कथा का विश्राम किया गया। कार्यक्रम में अलका पांडे, राघव दत्त मिश्रा, अशोक मिश्रा, गरिमा पांडे, अनूप मिश्रा, अशोक गर्ग, रमेश चंद त्रिपाठी, सुरेंद्र सफ्फड़, इंदिरा पांडे, रेनू सिगतिया, हर्षित सिगतिया आदि लोग उपस्थित रहे।
देवताओं की स्तुति गुरुजनों एवं संतों का सम्मान: डा0 शिवओम अम्बर
