फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। सेवा परमो धर्म फाउंडेशन के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर नैमिषारण्य से आये बजरंगी महाराज ने मनु शतरुपा के चरित्र पर वर्णन किया। शहर के पाण्डेश्वरनाथ मंदिर में चल रही कथा के तृतीय दिवस पर मनु शतरुपा चरित्र, सृष्टि वर्णन, सती प्रसंग पर प्रवचन करते हुए कहा कि मनु सतरुपा ने नैमिषरण्य में हजारों दिव्य वर्ष तक तप करके भगवान के स्वरुप पुत्र रुप में प्राप्ती का वरदान प्राप्त किया। सृष्टि क्रम में १४ भुवन, सात दीप, सात लोको का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। सती चरित्र के बारे में उपस्थित माताओं को स्त्री धर्म एवं पतिव्रत धर्म की शिक्षा दी। धु्रव चरित्र पर चर्चा करते हुए बजरंगी महाराज ने बताया कि ईश्वर की प्राप्ती के लिए आयु व संसारिक साधनों की आवश्यकता नहीं है। धु्रव ने अपने बाल मन से परमात्मा की गोद में खेलने का संकल्प किया। कई बाधायें धु्रव को लक्ष्य प्राप्ती में रोक नहीं सकी। धु्रव चरित्र जीवन में सदकर्म की स्थिरिता का संकेत करता है। संस्कृत महाविद्यालय सीतापुर के व्याकरण विभागाध्यक्ष आचार्य नितिन एवं साहित्याचार्य नीरज दीक्षित ने विधान पूर्वक यजमान कृष्ण कुमार दीक्षित ने पूजन सम्पन्न कराया। संस्था अध्यक्ष केदार शाह ने व्यवस्था देखी। आरती व प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।
ईश्वर की प्राप्ती के लिए आयु व संसारिक साधनों की आवश्यकता नहीं: बजरंगी महाराज
