फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। संस्कार भारती की कार्यशाला में शास्त्री नृत्य की कथक कार्यशाला में छात्रों को विशेष सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी एवं सांस्कृतिक विभाग उत्तर प्रदेश लखनऊ से बनारस घराने की प्रशिक्षिका सुष्मिता शुक्ला भारत की प्राचीन नृत्य विद्या जो लुप्त हो चुकी है इसका प्रशिक्षण दे रही है। बच्चे बड़े लगन और रुचि के साथ सीख रहे हैं। कथक नृत्य की विशेष नृत्यांगना सुष्मिता शुक्ला बताती है कि कथक भारत की प्राचीन नृत्य विधा है। वैदिक युग में वेद शास्त्र पुराणो की कथक नृत्य के भाव उदय होता है। जिसमें अपने इष्ट देव की आराधना भाव नृत्य के द्वारा भक्ति करता है। समय-समय पर परिवर्तन आया देव मंदिरों से राजघराने, मुगल घराने आधुनिक काल में आधुनिक हुआ। भारत सरकार एवं संस्कार भारती मिलकर लुप्त कलाओं को संरक्षण दे रही है। भावी पीढ़ी के बच्चे बड़े चाव और लगन के साथ सीख रहे हैं। निर्देशक डॉ0 शोभित कुमार एवं निर्देशक शिशिर प्रांतीय महामंत्री सुरेंद्र पांडेय के विशेष सहयोग एवं अकादमी की सराहना की जो समय -समय पर विशेषकों के निर्देशन में बच्चों का मार्गदर्शन हुआ। मैं बच्चों को नया पुराना दोनों ढंग की प्रस्तुति में ईश वंदना, गुरु वंदना, सलामी, तीन ताल पैरों के चक्कर हाथों और मुख की विशेष मुद्रा भाव नृत्य की भाव-भंगिमा का प्रदर्शन के तरीके अपने अनुभव के आधार पर प्रशिक्षण दे रही हूं। मेरी सहयोगी कुमारी स्नेहा श्रीवास्तव छात्राओं को लगन के साथ सीखा रही है। बच्चे बड़े चाव के साथ सीख रहे हैं। संस्कार भारती के सदस्यों एवं पदाधिकारी का विशेष सहयोग है। जिसमें मुझे सफलता मिल रही है। कार्यशाला में विशेष सहयोग डॉ0 सर्वेश श्रीवास्तव, सुरेंद्र पांडेय, अरविंद दीक्षित, डॉ0 नवनीत गुप्ता, कुलभूषण श्रीवास्तव, नरेंद्र मिश्रा, रविंद्र भदौरिया, आदेश अवस्थी, अर्पण शाक्य आदि लोग सहयोग कर रहे हैं।
कथक नृत्य आध्यात्मिक शक्ति एवं भक्ति है: सुष्मिता शुक्ला
