संचारी रोग नियंत्रण विशेष अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। चूहे फसलों को बुवाई से लेकर अन्न भण्डारण तक किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचात रहते हैं। इनके नियंत्रण के लिए समय-समय पर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किये जाते हैं। चूहे फसल के अलावा हमारे दैनिक उपयोग की वस्तुओं को कुतर कर क्षतिग्रस्त करते हैं। इसके अलावा चूहे/छछूॅदर अनेक प्रकार के रोगों को फैलाने के लिए कारक का भी काम करते हैं। रोडेन्टस स्कव टाइफस नामक बीमारी चूहों के वालों व कानों में पाये जाने वाले पिस्सू से होती है। जो स्कव टाइफस ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुषी नामक वैक्टीरिया के कारण फैलती है। यह संक्रमित लार्वा माइटस कीट के काटने से इंसानों में फैलती है। इस संक्रमित कीट के काटन के १० दिन के अंदर लक्षण नजर आने लगते हैं। शरीर पर काटी हुए जगह पर चकत्ते बन जाते हैं और पपड़ी भी पड़ सकती है। रोगी को बुखार और ठंड लगने के साथ सर दर्द, शरीर और मांसपेसियों में दिक्तत हो सकती है, लक्षण प्रकट होते ही रोगी को तुरन्त चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। लेप्टोस्पायरोसिस को रेट फीवर के नाम से भी जाना जाता है। यह जीवाणु संक्रमण है, जो लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के कारण होता है। यह जीवाणु पानी और गीले मैदान में पनपते हैं। जो रोटेड चूहों को संक्रमित करते हैं और संक्रमित चूहे/छछूॅदर जहॉ पर भी मूत्र करते हैं और उस स्थान पर जिसे भी अन्य जीव का सम्पर्क होता है, वह भी संक्रमण का शिकार हो जाता है। संक्रमण एक संक्रमित जानवर के मूत्र से या मृत जानवर से संक्रमित ऊतक के माध्यम से फैल सकता है। यह बैक्टीरिया कटी त्वजा, मुंह, नाक या आंखं और दूषित पानी से फैलता है। इसके अलावा दूषित मिट्टी, कीचड़, जल भराव के पानी आदि के सम्पर्क में आने से इस बीमारी के फैलने की अधिक सम्भावना रहती है। बरसात के दिनों में यह रोग अधिक तेजी से फैलत है। इस रोग के लक्षणों में ठंड लगने से तेज बुखार, सिरदर्द, बदनदर्द, लाल आंखें, भूख की कमी, उल्टी, दस्ता आदि होते हैं। रोगी को लक्षण प्रतीत होते ही तुरन्त चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। यह जानकारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने दी है।
कई बीमारियां फैलाने में सहायक होते हैं चूहे- जिला कृषि अधिकारी
