मौत का सफर, डग्गामार वाहन कर रहे जिन्दगी से खिलवाड़

मानक से अधिक सवारियां भरकर वसूल रहे मनमाना किराया
रोडवेज बसें न चलने से लोग मजबूरी में कर रहे हैं यात्रा
नवाबगंज, समृद्धि न्यूज। क्षेत्र में यातायात व्यवस्था डग्गामार वाहनों के सहारे है। जिला मुख्यालय से रोडवेज बसों का संचालन न होने के कारण क्षेत्र के वाशिंदे डग्गामार वाहनों से सफर करने को मजबूर है। जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और साथ ही किराया भी अधिक देना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का समाधान करने को कोई पहल नहीं कर रहे हैं।
जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर होने के कारण नवाबगंज का इलाका कई समस्याओं से घिरा हुआ है। अधिकारियों की अनदेखी के कारण समस्याओं का निराकरण नहीं होने से दिन पर दिन समस्या बढ़ती जा रही हैं। क्षेत्र में यातायात की समस्या विकराल है। लंबे समय से नवाबगंज के लोगों को आवाजाही के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हंै। क्षेत्र में जिला मुख्मालय से रोडवेज बसों का संचालन नहीं होता है। जिसके कारण फर्रुखाबाद, अचरा, अलीगंज, मोहम्मदाबाद, मंझना, कायमगंज को आने-जाने के लिए डग्गामार वाहनों से सफर करते हैं। जिससे समय की बर्बादी होती है साथ ही किराया भी अधिक वसूला जाता है। साथ डग्गामार वाहन चालक भूसे की तरह सवारियां भरकर वाहनों को बेखौफ तेज गति से दौड़ते है। अनफिट वाहन सडक़ों पर दौड़ते हैं। जिनसे दुर्घटनाओं का भी डर बना रहता है, लेकिन क्षेत्र के लोगों को मजबूरी है आखिर डग्गामार वाहनों के अलावा कोई साधन भी तो नहीं है। मजबूरी बस क्षेत्रवासी डग्गामार वाहनों में बैठकर आते जाते हंै। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को यातायात की समस्या शायद दिखती ही नहीं है। परिवहन विभाग के अधिकारी फर्रुखाबाद, अचरा, अलीगंज, मोहम्मदाबाद, मंझना, कायमगंज तक रोडवेज बसों का संचालन जिला मुख्यालय से करना उचित नहीं समझ रहे है। इसके लिए कोई बार इलाके के लोगों ने मांग भी की, लेकिन कोई सुनवाई नही हुई।

ये हैं नियम, लेकिन नहीं करता कोई पालन

नवाबगंज। बताते चलें कि नियम के अनुसार टेंपो में आठ सवारियों से ज्यादा नहीं बैठायी जा सकती तथा टेंपो और डग्गामार वाहनों में डेक या टेपरिकार्डर नहीं चलाया जा सकता तथा प्रदूषण और वाहनों के कागजात पूर्ण होने चाहिए और उनके पास नगर के लिए भी परमिट होना चाहिए, लेकिन तीनों नियमों पर उपरोक्त डग्गामार वाहन नहीं कर रहे हैं। पुलिस को पैसा देकर बेरोकटोक मौत का संदेश लेकर बेलगाम फर्राटा भरते नजर आते हैं।

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