एसटीएफ के हत्थे चढ़े प्रोफेसर से दो करोड़ की ठगी करने वाले ठग,नगद रुपए,मोबाइल फोन तथा चार पहिया वाहन बरामद

समृद्धि न्यूज़ लखनऊ। प्रदेश की एसटीएफ ने एसजीपीजीआई के एसोसिएट प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट करके लगभग दो करोड़ रूपये की ठगी करने वाले गैंग के दो सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।इन दोनों
अभियुक्तों का नाम क्रमशः लोकेश जैन और पवन जैन है जो राजस्थान के रहने वाले हैं।इन दोनों अभियुक्तों के पास से नौ लाख 91 हजार रुपए नगद,तीन मोबाइल फोन तथा चार पहिया वाहन बरामद किया गया है। जानकारी के मुताबिक
एसटीएफ को विगत काफी समय से सोशल मीडिया के माध्यम से काॅल करके स्वयं को पुलिस/ईडी/सीबीआई आदि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डरा धमकाकर ठगी करने वाले संगठित गिरोहों के सक्रिय होने की सूचनाएं प्राप्त हो रही थी।इस सम्बन्ध में एसटीएफ की विभिन्न टीमों/इकाईयों को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया था जिस क्रम में पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह के निर्देशन मे गठित टीम द्वारा अभिसूचना संकलन की कार्यवाही प्रारम्भ की गयी तथा अभिसूचना तन्त्र को सक्रिय किया गया।विगत दिनों लखनऊ स्थित एसपीजीआई के एक एसोसिएट प्रोफेसर के मोबाइल पर किसी अज्ञात नम्बर से काल आई थी।उनके द्वारा काल रिसीव करने पर काॅलर द्वारा स्वयं को सीबीआई मुम्बई का पुलिस अधिकारी बताकर कहा गया कि मनी लांड्रिंग का केस हुआ है जिसमें आपके खाते का इस्तेमाल किया गया है।इसी तरह बात करके उनको प्रभाव मे लेते हुए बैंक व उनकी सारी डिटेल प्राप्त कर लिया गया।इसके उपरान्त लगभग पांच दिन से अधिक समय तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया एवं उनके खाते से लगभग दो करोड़ से अधिक का पैसा विभिन्न खातो में ट्रान्सफर कर लिया गया।जब इनको इस बात का एहसास हुआ कि मेरे साथ ठगी की घटना हो गयी है तब इनके द्वारा थाना साइबर क्राइम में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कराया गया।अभिसूचना संकलन के क्रम में तकनीकी विशेषज्ञता एवं मुखबिर के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि स्वयं को पुलिस अधिकारी/सीबीआई अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गिरोह के कुछ सदस्य शालीमार वन वर्ल्ड शहीद पथ के पास मौजूद हैं, यदि जल्दी किया जाय तो पकड़े जा सकते हैं।इस सूचना पर उपनिरीक्षक तेजबहादुर सिंह के नेतृत्व में मुख्य आरक्षी कृष्ण कान्त शुक्ला तथा सुनील यादव की टीम द्वारा उक्त स्थान पर पहुंच कर मुखबिर की निशानदेही पर उपरोक्त अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया,जिनके पास से उपरोक्त बरामदगी हुई है।गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि इन लोगों के गिरोह ने एसजीपीजीआई के एक डाॅक्टर के मोबाईल नम्बर पर काल करके खुद को पुलिस/सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हे डराते धमकाते हुए उनकी व्यक्तिगत जानकारी लेकर उनके खाते से रूपये ट्रांसफर कराकर, गैंग के सदस्यों द्वारा अरेंज किये हुए अलग अलग लोगों के खातों में रूपये ट्रांसफर कर दिये थे।इन लोगों के पास मिले रूपये उन्ही खातों से निकाल कर लाये थे। इन रूपयों को गिरोह के सदस्यों को देना था तथा फिर ये लोग आपस मे मिलकर रूपये बाँट लेते है।अभियुक्तों द्वारा बताये गये बैंक खाते,वालेट आदि की जानकारी व गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं।अभियुक्तों से बरामद इलेक्ट्रानिक उपकरणों का फाॅरेसिंक परीक्षण कराया जायेगा।उपरोक्त गिरफ्तार अभियुक्तों को थाना साइबर क्राइम में पंजीकृत अभियोग में दाखिल किया जा रहा है।अग्रिम विधिक कार्यवाही स्थानीय पुलिस द्वारा की जायेगी।

अमिताभ

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