लगातार बारिश से दिल्ली-NCR में जलभराव, तापमान गिरने से छाया कोहरा, कल भी बरसेंगे मेघ

दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार सुबह अचानक से शुरू हुई झमाझम बारिश ने लोगों को चौंका दिया। घने बादलों और तेज बारिश के कारण दोपहर के समय ही अंधेरा छा गया। सड़कों पर वाहन चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। बारिश से तापमान में गिरावट भी आई है। मौसम विभाग का कहना है कि बारिश कल भी हो सकती है। गरज के साथ कुछ जगह ओलावृष्टि और तेज हवा चलने का अनुमान है। विभाग ने नए साल की पूर्व संध्या से पारा लुढ़कने के आसार जताए हैं।
दिल्ली। दिल्ली में शुक्रवार सुबह से लगातार बारिश हो रही है, जिससे शहर के कई हिस्सों में गंभीर जलजमाव और यातायात जाम की समस्या उत्पन्न हो गई। दिल्ली के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहने के कारण इलाके में भारी जलजमाव के कारण यातायात बाधित हो गया है। बुराड़ी इलाके में कई जगहों पर जलभराव देखा गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, शहर में न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस जबकि अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने आज बारिश के साथ आंधी की भविष्यवाणी की है। दिनभर रुक-रुककर बारिश होने के चलते नोएडा में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या भी देखने को मिली। सेक्टर-18, 16, 15, सेक्टर-62 और एक्सप्रेसवे जैसे इलाकों में वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में और बारिश होने की संभावना है। बारिश ने ठंड को और बढ़ा दिया, जिससे शहरवासियों को ठंड का अधिक अहसास होने लगा है। बारिश के कारण सड़कें फिसलन भरी हो गईं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड का ये दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है, और शहरवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं, तापमान में गिरावट के चलते लोग गर्म कपड़े पहनकर बाहर निकलने लगे हैं। स्थानीय प्रशासन ने ट्रैफिक की स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती की है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। नोएडा में सुबह छह बजे से हल्की वर्षा होने के बाद सड़कों पर वाहनों की गति धीमी हो गई, जबकि कई सेक्टरों में पानी भर गया। वर्षा होने के दौरान लोगों को ऑफिस और छात्र-छात्राओं को कॉलेज जाने में दिक्कत हुई। लगातार वर्षा होने से वायुमंडल पूरी तरह साफ नजर आया। कई वाहन चालकों को सड़क पर दिक्कत भी महसूस हुई। मौसम विभाग का मानना है कि शनिवार को भी नोएडा और अन्य इलाकों में वर्षा होने से बादल छाए रहेंगे।

गुरुग्राम में भी बदला मौसम का मिजाज

साइबर सिटी में लगातार हो रही बारिश से मौसम का मिजाज बदला गया। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड हो रही बर्फबारी के बाद बृहस्पतिवार की रात 3बजे शुरू हुई वर्षा से साइबर सिटी में ठिठुरन बढ़ गई वहीं सड़को पर पानी जमा होने से लोगों की परेशानी भी बढ़ गई हैं।

सर्दी में बारिश की वजह क्या है?

सर्दी में बारिश की वजह है पश्चिम विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस. अब इसे आसान भाषा में समझ लेते हैं. दरअसल, भूमध्य सागरीय क्षेत्र में एक लो प्रेशर वाला तूफान उठता है. इसकी हवाएं उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ती हैं और वायुमंडल के साथ मिलकर ऐसी स्थिति बनाती हैं जो बारिश और बर्फबारी की वजह बनती हैं. कोहरा बढ़ता है. कोहरा और बर्फबारी तो होती है, लेकिन हर साल बारिश हो यह जरूरी नहीं है.  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) पुणे के मौसम वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च की है. उनकी रिसर्च कहती है, पिछले कुछ सालों में देश पश्चिमी विक्षोभ का असर बढ़ा है. इसका असर जैसे-जैसे बढ़ेगा, बारिश होगी. कोहरा पड़ेगा. इसलिए ठंड भी बढ़ेगी.

क्या और सर्दी बढ़ेगी?

सर्दी की बारिश का असर तापमान पर सीधा पड़ता है. हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली ठंडी हवा मैदानी इलाके में तापमान और गिराती हैं. इस तरह तापमान गिरने से ठंड बढ़ती है. आमतौर पर ठंड में मौसम में सूखापन होता है, लेकिन बारिश के बाद इसमें नमी की मात्रा बढ़ती है. इससे ठंड का अहसास और ज्यादा बढ़ता है. यही वजह है कि ऐसे मौसम में और भी ज्यादा अलर्ट रहने की सलाह दी जाती है.

बारिश से किसे फायदा, किसे नुकसान?

अब सवाल है कि सर्दी की बारिश से किसे फायदा होगा और किसे नुकसान? अब इसे समझ लेते हैं. बारिश से सीधा फायदा रबी की फसलों को होता है. रबी की फसल के लिए बारिश जरूरी मानी जाती है. इससे खेतों में नमी बनी रहती है. बारिश के कारण मिट्टी में पोषक तत्व घुल जाते हैं जो पौधों तक पहुंचते हैं, लेकिन एक लिमिट में होने वाली बारिश ही फायदा पहुंचाती है. दिल्ली-एनसीआर समेत उन क्षेत्रों के लिए बारिश फायदेमंद है जहां प्रदूषण रहता है और हवा साफ नहीं है. बारिश हैवी पार्टिकल्स को नीचे लाती और हवा की क्वालिटी में सुधार होता है. मानसून के बाद धीरे-धीरे नदियों और तालाबों का जलस्तर कम हो जाता है. बारिश पानी के स्तर को बढ़ाने का काम काम करती है. इसके अलावा बारिश हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर के लिए पानी की कमी को भी पूरा करती है.

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