फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में मेला श्रीरामनगरिया में चल रहे वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर में प्रात:काल यज्ञ किया गया। नेता जी सुभाषचन्द्र बोस की जयन्ती पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने बताया कि वेद में दो शक्तियों का वर्णन है ब्रह्मशक्ति और क्षात्रशक्ति, किसी भी राष्ट्र की उन्नति के लिए ब्रह्मशक्ति और क्षात्रशक्ति की महती आवश्यकता होती है। नेता जी सुभाषचंद्र बोस के अन्दर ये दोनों शक्तियां विद्यमान थीं। सुभाषचंद्र बोस एक ऐसे क्रांतिकारी थे, जिन्होंने तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देकर भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेन्ट एटली ने कहा था कि हम भारत देश को छोडऩे पर इसलिए मजबूर हुए क्योंकि भारत के अंदर हमें एक आग दिखाई दे रही थी और वो आग नेता जी सुभाषचन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज थी। आचार्य ने कहा कि हम सब वैदिक क्षेत्र की ओर से सुभाषचंद्र बोस की जयन्ती पर उन्हें शत-शत नमन करते हैं। आचार्य प्रदीप शास्त्री ने कहा कि सुभाषचन्द्र बोस महर्षि दयानन्द सरस्वती से अत्यधिक प्रभावित थे। इसीलिए उन्होंने कहा था कि आधुनिक भारत के आद्यनिर्माता तो दयानन्द ही थे, ऋषि दयानन्द की विचारधारा को लेकर भारत देश के नौजवानों के अन्दर क्रान्ति का संचार किया। पण्डित धनीराम बेधडक़, पण्डित शिवनारायण आर्य, पण्डित राजेश आर्य आदि ने राष्ट्रभक्ति गीतों से नेता सुभाषचंद्र बोस को स्मरण किया। मंच का संचालन आचार्य विवेक ने किया। सभा में उत्कर्ष आर्य, उदयराज आर्य, संदीप आर्य, हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, अजीत आर्य आदि उपस्थित रहे।
चरित्र निर्माण शिविर में किया गया वेद शक्तियों का वर्णन
