कम्युनिस्ट पार्टी ने बिजली के निजीकरण का विरोध कर राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपकर समस्याओं का निदान करने की मांग की है। 13 सूत्रीय दिये गये ज्ञापन में बताया कि हमारी पार्टी किसानों-मजदूरों व आम मेहनतकश जनता के हक को ध्यान में रखकर बिजली के निजीकरण का विरोध केन्द्र सरकार द्वारा बिजली संशोधन बिल, 2020 लाने के समय से ही विरोध कर रही है। इस कानून की वापसी 13 महीने के दिल्ली सीमाओं पर ऐतिहासिक किसान आंदोलन का मुख्य मुद्दा भी रहा था। 9 दिसंबर 2021 को सरकार ने भी लिखित वादा किया था कि किसानों से वार्ता किए बिना बिजली संशोधन बिल नहीं लाया जाएगा, लेकिन मोदी नेतृत्व की केन्द्र सरकार अपने वादे से मुकर गई और लोकसभा में बिजली संशोधन बिल 2022 पेश हुआ। अब तमाम राज्य सरकारों की तरह यूपी में भी योगी सरकार बैक दरवाजे से सुधार के नाम पर बिजली के निजीकरण का रास्ता अपना रही है। जब पहले से ही यूपी की गरीब, मेहनतकश जनता महंगी बिजली की मार झेल रही हो, ऐसे में बिजली के निजी क्षेत्र में जाने से आम जनजीवन में अंधेरा छा जाएगा। लाखों बिजली कर्मी बेकार और बेरोजगार हो जायेंगें। आज बिजली रोटी, कपड़ा और मकान की तरह आवश्यक जरूरत बन गई है। बिजली देश के आम आदमी के जीवन में रोशनी भरने का काम कर रही है। किसानों को सिंचाई के लिए फ्री बिजली की जरूरत हैं, गरीबों के लिए घर में रोशनी के लिए फ्री बिजली चाहिए, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, कृषि आधारित समय निजी हाथों में सौंपने के लिए मौजूदा सरकार और कारपोरेट परस्त अधिकारियों की साजिश चल जारी है। हम मांग करते है एक लाख करोड़ से अधिक के घाटे के लिए सरकार की नीतियां दोषी हैं। कम्युनिस्ट पार्टी इस निजीकरण का विरोध करती है और प्रदेश में निजीकरण का फैसला वापस न लिया गया तो विरोध प्रदर्शन किया जायेगा। इस मौके पर जिला मंत्री सुनील कटियार, राजकुमार शर्मा आदि कम्युनिस्ट नेता मौजूद रहे।

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