रामताल में जो भी श्रद्धालु करता स्नान, उसके सभी रोग होते दूर
नवाबगंज, समृद्धि न्यूज। नवाबगंज के गांव कक्योली स्थित रामताल आश्रम में में स्थित शिव मंदिर का बैसे तो कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि लगभग 700 वर्ष पूर्व मंदिर के स्थान पर ढांक का एक जंगल थाष। इस दौरान जनपद इटावा के गांव मंछना निवासी साधु हरिदास ने यहां पहुंचकर साफ -सफाई कर छोटे से मंदिर में राम जानकी की स्थापना की थी। धीरे-धीरे मंदिर की ख्याति बढ़ी, तो एक बार जब मंदिर आश्रम में भंडारे का आयोजन किया गया। कढ़ाई में घी खत्म हो गया था। यह बात उनके शिष्यों ने बाबा हरी दास जी महाराज को बताई, तो बाबा हरिदास जी महाराज ने अपने शिष्यों से कहा कि रामताल आश्रम में बने तालाब से जितने घी की जरूरत हो उतना पानी लेकर कढ़ाई में छोड़ दो, बाद में भोर होते ही उतना ही घी तालाब में छोड़ देना। जैसे ही जल कढ़ाई में छोड़ा जल घी बन गया। कढ़ाई से माल पुआ सिंकने लगे। भंडारा पूर्ण हुआ। यह चमत्कार देख क्षेत्र में प्रशंसा होने लगी। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा, दशहरा मेला, माघ मेला, कार्तिक पूर्णिमा व व पंचमी सप्तमी व नवमी को कई जिलों से हजारों श्रद्धालु मंदिर पर आकर दर्शन कर मन्नते मांगते हैं। रामताल मंदिर आश्रम परिसर में मेला भी लगता है। बाबा हरिदास महाराज के बाद मंगलदास, धर्मदास महाराज, नारायण दास महाराज, रामकुमार दास, महाराज अवधेश कुमार दास मंदिर के महंत बने। लगभग 30वर्ष पूर्व महंत रामकुमार दास महाराज के द्वारा मंदिर परिसर में शिव मंदिर शिवलिंग की स्थापना कराई गई। अवधेश कुमार दास महाराज के शरीर छोडऩे के बाद अवधेश कुमार दास महाराज के चेला बाबा मनमोहन महाराज को विपक्षियों द्वारा गंभीर षड्यंत्र रचकर जेल में भिजवा दिया। जो कि अब भी जेल में हैं। मनमोहन दास महाराज के जेल जाने के बाद कई महात्मा अपने को अवधेश कुमार दास महाराज का चेला बता रहे हैं और रामताल मंदिर आश्रम में अपना अधिकार जमाना चहातें हैं। जबकि असली चेला बाबा मनमोहन दास महाराज हैं जो कि जेल में है। ऐसा कुछ संतों और ग्रामीणों का कहना है। रामताल मंदिर में परिसर में नन्दी, माता उमा, गणेश, हनुमान, राम, लक्ष्मण, सीता, दुर्गा, सरस्वती आदि देवी देवताओं की मूर्ति स्थापित हैं। रामताल मंदिर के परिसर में बने तालाब में जो भी श्रद्धालु स्नान करता है उनके सभी रोग कष्ट दूर हो जाते हैं। ऐसा दावा ग्रामीण करते हैं।
श्री रामताल मंदिर का इतिहास………. रामताल मंदिर का आखिर कौन है असली महंत ?
