भाजपा नेताओं को हार का नहीं कोई गम, अपना वोट देने पर थपथपा रहे है पीठ

[उपकार मणि उपकार]

*हार की समीक्षा कर चिन्हित किये जायेंगे भितरघाती

*अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय

*अपना बूथ जितवाकर संतुष्ट है एक जनप्रतिनिधि
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जिस तरह जिले की सात सीटों पर हार हुई है, उससे यह तो साफ हो गया कि संगठन में भितर घातियों की कमी नहीं है। भले ही पार्टी के नेता अपनी पीठ थपथपाते सोशल मीडिया पर यह कहते नहीं थक रहे है मैंने अपना वोट दिया है, लेकिन जो परिणाम आये है उससे यह तो साफ हो गया कि जिले में चार विधायक, एक सांसद, एक एमएलसी की जनता में कितनी पकड़ है? यह बात अलग है कि नव गठित नगर पंचायत संकिसा बसंतपुर व खिमसेपुर भले ही भाजपा जीत गयी हो, लेकिन दांत वहां भी खट्टे हो गये। संगठन ने सभी पंचायतों व नगर पालिका के लिए अलग-अलग प्रभारी बनाकर सबकी जिम्मेदारी दी थी। उसके बावजूद पूर्व में जिन स्थानों पर भाजपा के अध्यक्ष थे वहां पर भी अपनी कुर्सी नहीं बचा पाये। इन नेताओं को अपनी पार्टी का हार का गम नहीं है, बल्कि इस बात की खुशी जाहिर कर रहे है अपना वोट देकर पार्टी को मजबूत करने का काम किया है।

प्रदेश के मुखिया ने नगर पालिका/नगर पंचायत में हुई हार को गंभीरता से लेते हुए समीक्षा करने का फरमान जारी कर दिया है। तो वहीं अंदर खाने की खबर यह है कि पार्टी में जिन लोगों ने भितरघात किया है उनकी सूची बनायी जा रही है और हुई हार के लिए पार्टी के पदाधिकारियों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों को भी पार्टी जिम्मेदार ठहरा रही है। जिन्होंने भितरघात किया है उन पर क्या कार्यवाही संगठन करेगा यह तो पता नहीं, लेकिन जिन अधिकारियों पर हार का ठीकरा भाजपा नेता फोड़ रहे है उन पर तो गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है। मतगणना के दौरान जिलाध्यक्ष ने तो साफ शब्दों में कह दिया था कि हमारी हार का मुख्य कारण प्रशासन है। अब उनके आरोप को संगठन कितनी गंभीरता से लेता है यह कुछ दिन के अंदर ही सामने आ जायेगा। बीते दिन एक विधायक के क्षेत्र में भाजपा हारने का समाचार क्या छपा कि उनकी नींद हराम हो गयी और यह सफाई देने लगे कि मैने तो अपने बूथ पर पार्टी को जिताया है पर यह साबित नहीं कर पाये कि जिस वार्ड में पार्टी के सभासद जीते है उन पर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को कितने वोट दिलाये। निकाय चुनाव के बाद अब सीधे 2024 की लड़ाई पार्टी को लडऩी है। निकाय चुनाव में जिस तरह अपने आपको को कट्टरवादी भाजपाई कहे जाने वाले लोगों ने भितरघात किया है अगर संगठन ने इनको बेनकाब नहीं किया तो 2024 में कुछ भी हो सकता है। जिन्हे गद्दारी करनी है उन्हे बहाना चाहिए, कभी प्रत्याशी मन का नहीं है तो पार्टी ने मुझे मौका नहीं दिया। ऐसे लोग कहावत है उखरी के भीतर और चोट के बाहर, सत्ता का लाभ लेने के लिए तन बदन और मकान भगवा कलर व पार्टीनुमा झण्डा दिखायी देगा, लेकिन मन में राम बगल में ईटें जैसी स्थिति दिखायी देती है। कुछ लोग पार्टी के झण्डे के नीचे कई गैर कानूनी कार्य कर रहे है, जिन पर सरकार की ओर से प्रतिबंध है। कहे जाते है विधायक के खास आदमी, लेकिन वोट दूसरे दल को खुलेआम दिया, यह पहला मौका नहीं है। इससे पूर्व भी निकाय चुनाव राज्य महिला आयोग की सदस्य डा0 मिथलेश अग्रवाल पूर्व चेयरमैन कायमगंज को फर्रुखाबाद से प्रत्याशी बनाया गया था। उसमें भी जमकर भितरघात पार्टी के लोगों ने किया था। अगर उन्हे पहले ही बेनकाब कर दिया गया होता तो शायद आज यह परिणाम नहीं होता। सूत्रों की माने आज कल में ही पार्टी बैठक कर अपनी पराजय की समीक्षा करेगी। ऐसे में तथाकथित भाजपाइयों में यह भय सता रहा है कि अगर मीटिंग में गये तो क्या स्थिति होगी?

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