महात्मा रामचंद्र के जलसे में बही श्रद्धा और भक्ति की सूफियानी बयार

 शान्तिपाठ और आंतरिक अभ्यास के साथ सौ वां सालाना जलसा शुरु
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। सूफी संत महात्मा रामचंद्र जी महाराज का सौ वां सालाना जलसा शान्ति पाठ एवं आंतरिक अभ्यास के साथ उनकी समाधि पर शुक्रवार को शुरु हुआ। देश भर सूफी अनुयायियों ने महात्मा जी की समाधि पर सजदा कर श्रद्धासुमन अर्पित किये। समारोह में देश की गंगा जमुनी तहजीब का नजारा भी दिखा। देर रात तक सजदा करने वाले महात्मा जी के अनुयायियों की भी भारी भीड़ उमड़ी। देश के चार बड़े सिलसिले में से एक नक्सबंदिया सिलसिले के सूफी संत रामचंद्रजी का जलसा शुक्रवार को फतेहगढ़ के नवदिया क्षेत्र में सुबह आंतरिक अभ्यास (ध्यान) और शांतिपाठ के साथ शुरु हुआ। इस अवसर पर प्रवचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। जलसे को संबोधित करते हुए महात्माजी के प्रपौत्र सूफी संत विनय सक्सेना ने कहा कि रामचंद्रजी ने धार्मिक कट्टरता से ऊपर उठकर सर्व, धर्म, सम्भाव की शिक्षा दी तथा निरंकार ब्रह्म से जुडऩे की पद्धति सिखायी। फरीदाबाद से पधारे बुजुर्ग सूफी संत प्रभात मोहन ने कहा कि जो लोग धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते वही वास्तव में सूफी और फकीर हैं। उन्होंने महात्मा रामचंद्रजी के करिशमायी किस्से सुनाकर श्रोताओं को आश्चर्यचकित कर दिया। जलसे में हर कोई महात्माजी की याद में डूबकर खुद को रुहानी ताकत से जोड़ता नजर आया। लोग बुजुर्ग सूफी संतों को घेरकर उनसे आशीर्वाद लेते रहे। महात्मा रामचंद्र के व्यक्तित्व और कृतित्व पर पुस्तकों की प्रदर्शनी लगायी गयी। कार्यक्रम में पूर्व जिला जज अलका श्रीवास्तव, प्रदीप बिसारिया, बजरंग दल के पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश दुबे, समीर सक्सेना, महात्मा जी की पौत्र वधू माधुरी सक्सेना, राजीव भगौलीवाल, शिवराज सिंह, सतेन्द्र सिंह, प्रीती सक्सेना एवं विमला देवी आदि मौजूद रहे। जलसे का समापन २० अप्रैल को होगा।

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