वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन से खुले शोध के नए आयाम

उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलेगा वैश्विक ज्ञान का लाभ

सैफई, समृद्धि न्यूज। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के छात्रों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान के वैश्विक द्वार अब पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गए हैं। विश्वविद्यालय को भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन” (ओएनओएस) से जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से छात्र अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं, डेटाबेस और वैज्ञानिक संसाधनों तक निःशुल्क पहुँच प्राप्त कर सकेंगे।
इस पहल को लागू कराने में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.के. जैन की महती भूमिका रही है, जिनके प्रयासों से यह सुविधा छात्रों और संकाय के लिए उपलब्ध हो सकी है। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कुलपति का आभार व्यक्त करते हुए इसे शैक्षणिक क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम बताया है। ओएनओएस योजना का उद्देश्य वैज्ञानिक और तकनीकी साहित्य तक व्यापक व समान पहुँच प्रदान करना है, ताकि देश भर के सभी शैक्षणिक और शोध संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थी व शोधकर्ता एक समान स्तर पर जानकारी प्राप्त कर सकें। यह योजना विशेष रूप से चिकित्सा क्षेत्र के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि उन्हें अब महंगी सदस्यता वाली अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं और वैज्ञानिक लेखों को पढ़ने के लिए किसी आर्थिक बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. ऋत्विक भारद्वाज ने कहा कि यह सुविधा स्नातकोत्तर छात्रों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। इससे वे वैश्विक शोध तक पहुंच प्राप्त कर सकेंगे और अध्ययन के नए क्षितिज तलाश पाएंगे। महासचिव डॉ. विशेष कुलश्रेष्ठ ने कहा कि उच्च गुणवत्ता की शोध सामग्रियों तक पहुँच अब छात्रों को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा की गहराई से समझ विकसित करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा ज्ञान के अंतर को पाटने का कार्य करेगी।
उपाध्यक्ष डॉ. पारुल ने इसे पूरे छात्र समुदाय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि इस पहल से विश्वविद्यालय में मौलिक शोध की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना के अंतर्गत देश की प्रमुख वैज्ञानिक एवं तकनीकी पत्रिकाओं, शोध प्रकाशनों, ई-बुक्स, शोध डेटाबेस तथा अन्य डिजिटल संसाधनों को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सुविधा के लागू होने से छात्रों को वैश्विक मानकों के अनुरूप अध्ययन और अनुसंधान करने का अवसर मिलेगा, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुसंधान रैंकिंग को भी बल मिलेगा।

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