फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली कथक को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बिरजू महाराज कथक संस्थान के तत्वावधान में जारी ग्रीष्मकालीन कथक नृत्य कार्यशाला का समापन आवास विकास कॉलोनी स्थित एक स्कूल में हुआ। सात दिवसीय कार्यशाला का संचालन कथक प्रशिक्षिका अंजलि चौहान ने किया। जो कथक में विशिष्ट अनुभव रखती हैं एवं हाल ही में प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के द्वारा बच्चों को सफलतापूर्वक कथक नृत्य कार्यशाला का प्रशिक्षण दिया हैं। कार्यशाला 14 जून से 21 जून तक आयोजित की गई। जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के सहभगियों ने कथक की परंपरागत तकनीकियां, ताल, भाव, मुद्रा एवं प्रस्तुति की बारीकियां सीखीं। कार्यशाला के समापन पर बिरजू महाराज कथक संस्थान और संस्कृति विभाग की ओर से प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया जो अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्य अतिथि आकांक्षा समिति की अध्यक्ष डा0 वन्दना द्विवेदी ने कहा कि संगीत और नृत्य से आत्मिक शान्ति मिलती है। कथक उत्तर प्रदेश का प्रमुख नृत्य है। बिरजू महाराज कथक संस्थान पूरे राष्ट्र में प्रतिष्ठा का केंद्र है। कार्यशाला में बच्चों की प्रतिभाओं को निखारने के कार्य हुआ है जो आज की प्रस्तुतियों से परिलक्षित हुआ है। जिसे निरन्तर अभ्यास और साधना से निखारा जाने की आवश्यकता है। रश्मि सिंह ने कहा कि किसी भी साधना में गुरु का महत्व है और इस दायित्व को अंजलि चौहान ने अत्यंत सफलता से निभाने का प्रयास किया है। रिवेम्प इंडिया फाउंडेशन के वैभव राठौर ने कहा कि आज कला के क्षेत्र में प्रतिभाओं को बड़ा सम्मान मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को लाभ मिला है। इस अवसर पर कृष्ण सिंह चौहान, विमल राठौर, जसवीर राठौर, रश्मि सिंह, शाश्वत सोमवंशी भूपेन्द्र प्रताप सिंह, निहारिका पटेल, अन्जू सिंह, शान्तनु कटियार आदि मौजूद रहे।
भारतीय संस्कृति और परम्परा का मूल है नृत्य और संगीत: डॉ0 वन्दना द्विवेदी
