दहेज हत्या के मामले पिता-पुत्र को सात वर्ष का कारावास.

*पुत्री की मौत के बाद मां की भी हृदयगति रुकने से हो गई थी मौत
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। दहेत हत्या के मामले में अपर जिला जज विशेष एससी/एसटी एक्ट न्यायाधीश महेन्द्र सिंह ने अवधेश दीक्षित पुत्र बाबूराम, प्रशांत उर्फ शीलू पुत्र अवधेश निवासी जसमई थाना मऊदरवाजा को दोषी करार देते हुए 7-7 वर्ष के कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसी मामले में पुत्री की मौत के बाद मां की भी हृदयगति रुकने से मौके पर मौत हो गई थी।
विगत 12 वर्ष पूर्व थाना मऊदरवाजा पुलिस को दी गयी तहरीर में पीडि़त ने दर्शाया कि कि मैंने अपनी पुत्री शिल्पी की शादी प्रशांत उर्फ शीलू के साथ कि थी। मैंने अपनी सामथ्र्य के अनुसार दान दहेज दिया था। दिये गये दान दहेज से दामाद प्रशांत के पिता अवधेश दीक्षित नाराज रहते थे और मेरी लड़की को आये दिन अतिरिक्त दहेज के रूप में एक लाख रुपये की मांग करते रहते थे। पुत्री के मना करने पर पति व ससुर आये दिन शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताडि़त करने लगे। मैने उन लोगों को बहुत समझाने का प्रयास किया। मेरी पुत्री शिल्पी अपनी मां उषा को लेकर अपने ससुराल चली गयी। 24 मार्च 2011 को सुबह 7 बजे सूचना मिली कि मेरी पुत्री व पत्नी की प्रशांत व अवधेश ने हत्या कर दी। दोनों शव आरोपियों के घर पर पड़े है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक ने पुत्री की मौत के बाद हृदयगति रुकने से मां की भी मौत होना दर्शाया गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर साक्ष्य गवाह के आधार पर न्यायालय में धारा 498ए, 304बी व 4 प्रतिकार अधिनियम में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। बचाव पक्ष की दलील व शासकीय अधिवक्ता अशोक कटियार, अनुज प्रताप सिंह की कुशल पैरवी के आधार पर अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश महेंद्र सिंह ने प्रशांत, अवधेश को दोषी करार देते हुए धारा 498ए में 2 वर्ष कारावास व 5000 रूपये अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर ३ माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। धारा 304बी में 7 वर्ष कारावास से दंडित किया। धारा 4 में एक वर्ष का कारावास व 5 हजार रुपसे के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर 3 माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अभियुक्तगणों की सभी सजाये एक साथ चलेगी। अभियुक्तों द्वारा जेल में बितायी अवधि को सजा में समायोजित की जायेगी।

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