शिक्षकों व कर्मचारियों ने लंबित समस्याओं को हल करने की उठायी मांग
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। संयुक्त संघर्ष संचालन समिति द्वारा मुख्यमंत्री सम्बोधित ज्ञापन नगर मजिस्टे्रट को सौंपा गया। ज्ञापन में दर्शाया कि प्रदेश में शिक्षकों एवं राज्य कर्मचारियों तथा संविदा/मानदेय कर्मियों की वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान किया जाये। प्रदेश के शिक्षक, राज्य कर्मचारी तथा संविदा/मानदेय एवं अन्य श्रेणी के कार्मिक सरकार के महत्वपूर्ण अंग हैं। सरकारी नीतियों-योजनाओं, निर्णयों को जनता तक यही समाज पहुंचाता है। संज्ञान में लाना है कि कर्मचारियों, शिक्षकों की समस्याओं को हल करने में शासकीय अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि मुख्य सचिव के निर्देशों का पालन भी नहीं हो रहा है। दशकों से चली आ रही परम्पराओं एवं सुविधाओं में कटौतियां हो रही हैं। शिक्षक- कर्मचारी समाज की संख्या में निरन्तर कमी आ रही है पर नई नीतियों, कार्य पद्धतियों, डिजिटलाईजेशन के विस्तार आदि के कारण कार्यों का बोझ बढ़ता जा रहा है। किन्तु समस्याओं के समाधान हेतु कार्यवाही तो दूर, उनका संज्ञान तक नहीं लिया जा रहा है। फिर भी हम सब अपने अपने दायित्वों का निर्वह्न कर रहे हैं। शिक्षक-कर्मचारी समाज व उनके परिवार दबाव के वातावरण में जीवन यापन कर रहे हैं।
विगत वर्षों में मांगों व समस्याओं की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। राज्य सरकार द्वारा समाप्त किये गये भत्तों में से सचिवालय भत्ता तो बहाल कर दिया गया, परन्तु प्रदेश के अन्य विभागों में भत्ते बहाल नहीं किये गये। प्रदेश के लाखों संविदा/मानदेय कर्मी आदि के रूप में 15-20 वर्षों से कार्यरत शिक्षामित्र, अनुदेशक, मुख्य सेविकायें, लिपिकों, वाहन चालकों आदि कार्मिक नियमितीकरण/मानदेय वृद्धि की आशा में हैं। राज्यकर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में कैडर-रिव्यू की कार्यवाही वर्षों से शासन में लम्बित है। सरकार राजकीय शिक्षकों की सेवा का स्टेट्स तक दशकों से तय नहीं कर सकी है। आंदोलनों/अनुरोधों के बाबजूद पुरानी पेंशन की बहाली न होने तथा भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा एन0पी0एस0 और यू0पी0एस0 के मध्य विकल्प मांगे जाने से भी राज्य कर्मचारियों एवं शिक्षकों के असंतोष में वृद्धि हुई है। प्रदेश में ५० से कम छात्र वाले परिषदीय विद्यालयों को मर्जर करने की कार्यवाही से गांवों के गरीब, दलित, पिछड़े आदि श्रेणी के छात्र-छात्रायें, अभिभावक भी आहत हैं। दोनों विद्यालयों के मध्य 1 से 4 किलोमीटर की दूरी से व आवागमन की कठिनाईयों के कारण छात्र उपस्थिति घट रही है, इसे रोकने के लिये शिक्षकों पर दबाव बनाया जाता है। इस निर्णय से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो रही है और जिनकी नियुक्ति 01 अप्रैल 2005 के बाद हुई हो, उनको पुरानी पेंशन से आच्छादित किया जाये, आदि मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर राज्य कर्मचारी महासंघ की अध्यक्ष दीपिका त्रिपाठी, जिला महामंत्री प्रमोद कुमार दीक्षित, जितेन्द्र सिंह राठौर, विजय शंकर तिवारी, मजहर मोहम्मद खान, विमलेश शाक्य, शाविर खान, राकेश सारस्वत सहित बड़ी संख्या में शिक्षक कर्मचारी मौजूद रहे।
संयुक्त संघर्ष संचालन समिति ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
