दोस्ती हो तो ऐसी: अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए दी ऐसी विदाई, भावुक हो गये लोग

समृद्धि न्यूज। कैंसर की बीमारी से जुझ रहे एक व्यक्ति ने अपने दोस्तों को पत्र लिखा, जिसमें उसने उन्हें अंतिम बार राम-राम किया और कहा कि मेरी अंतिम यात्रा में नाचते हुए मुझे विदा करना। पांच साल बाद दोस्त ने यह वादा निभाया।
जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक शख्स ने अपने 71 वर्षीय जिगरी दोस्त की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उसकी शव यात्रा में नम आंखों के बीच गाजे-बाजे के साथ नाचते हुए उसे विदा किया। भावुक करने वाली यह घटना मंदसौर के जवासिया गांव की है, जहां अंबालाल प्रजापति ने गम के माहौल में अपने जिगरी दोस्त सोहनलाल जैन को नाचते हुए अंतिम विदाई दी। दोस्ती सिर्फ एक शब्द नहीं है, ये एक विश्वास है। जो बचपन, जवानी और बुढ़ापे तक साथ निभाता है। प्रदेश के मंदसौर जिले से दोस्ती की एक ऐसी ही दिल छू लेने वाली दास्तां सामने आई है। जहां, एक व्यक्ति ने दोस्त की मौत के बाद उसकी अंतिम इच्छा को पूरा किया। उसने बैंड बाजे के साथ शव यात्रा में डांस किया और अपने दोस्त को अंतिम विदाई दी।बताते है कि मंदसौर जिले के जवासिया गांव निवासी सोहनलाल जैन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीडि़त थे। ऐसे में 9 जनवरी 2021 को उन्होंने अपने मित्र अंबालाल प्रजापति और शंकरलाल पाटीदार के नाम एक पत्र लिखा था। इसमें अपने दोस्तों को संबोधित करते हुए सोहनलाल ने लिखा-अंबालाल प्रजापति और शंकरलाल पाटीदार को मेरा अंतिम बार राम-राम, अपने साथ वालों को भी मेरा अंतिम राम राम बोल देना। विशेष शुभ समाचार यह है कि मैं कागज लिख कर दे रहा हूं कि मैं जब इस दुनिया में न रहूं, तब तुम मेरी अंतिम यात्रा में शामिल होकर अर्थी के आगे नाचते-कूदते मुझे विदा करना। कोई रोना-धोना नहीं करना। खुशी-खुशी मुझे विदा करना। मनुष्य जीवन में जब से हम साथ हैं, इस बीच मुझसे अंजाने में कोई गलती हुई हो तो मुझे क्षमा करना। समय आने पर मेरी अंतिम इच्छा पूरी करना। घटना का वीडियो और सोहनलाल की ओर से लिखा गया पत्र सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर किया जा रहा है। लोग इस घटना को दोस्ती की अनूठी मिसाल के रूप में पेश कर रहे हैं। 51 वर्षीय अंबालाल प्रजापति ने कहा कि सोहनलाल कैंसर की चपेट में आ गए थे और उन्होंने रतलाम, मंदसौर से लेकर अहमदाबाद तक में इलाज करवाया, लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गए। उन्होंने बताया कि वह और सोहनलाल एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे और गांव की प्रभात फेरी में साथ-साथ शामिल होते हुए उनका रिश्ता और भी मजबूत हो गया। प्रजापति ने कहा, सोहनलाल मुझसे अक्सर कहा करते थे कि मैं मर जाऊं, तो रोना-धोना मत। मेरी अंतिम यात्रा में डांस करना। मैंने अपने मित्र की इच्छा के अनुसार उसकी अंतिम यात्रा में डांस किया। उन्होंने भावुक लहजे में कहा, दोस्ती निभानी थी और मैंने उसे अंतिम समय तक निभाई। भगवान से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति दें।

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