समाज को संस्कारवान बनाना आर्य समाज का उद्देश्य: संदीप आर्य

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आर्य समाज कमालगंज के तत्वावधान में आयोजित वेद प्रचार अभियान के अंतर्गत खुदागंज क्षेत्र के गांव केशरी नगला में श्रावणी उपाकर्म पर्व धूमधाम से मनाया गया। वृहद यज्ञ का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रों से ग्रामवासियों ने आहुतियां प्रदान कीं। यज्ञ के उपरांत विद्वानों ने पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए अपने वक्तव्य देकर ग्रामीणों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम के संयोजक आचार्य संदीप आर्य ने कहा कि वैदिक परंपरा में श्रावणी पर्व का बड़ा महत्त्व है। श्रावणी उपाकर्म वैदिक जीवन में एक वार्षिक पवित्र नवीनीकरण का पर्व है। इस दिन यग्योपवीत बदला जाता है और नया धारण किया जाता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वेदाध्ययन, गुरु-शिष्य परंपरा और ऋषि-स्मरण से जुड़ा हुआ गहन सांस्कृतिक आयोजन है। प्राचीनकाल में चतुर्मास के विश्राम के बाद इस दिन से गुरु और शिष्य पुन: वेदपाठ आरंभ करते थे। यह नई ऊर्जा और संकल्प का प्रतीक है। वेद ज्ञान देने वाले ऋषियों-जैसे वेदव्यास, वशिष्ठ, याज्ञवल्क्य, अगस्त आदि के प्रति अपनी कृतयज्ञता व्यक्त करने का पर्व है।
घनश्याम आर्य ने कहा कि यह सामाजिक एकता का पर्व है, इस अवसर सामूहिक वेदपाठ, गुरु-शिष्य मिलन और धार्मिक संवाद का होता है। आचार्य राम रहीस ने कहा कि वेदों के पठन पाठन को त्यागने के कारण सनातन धर्म का पतन हो रहा है सनातन गौरव को पुन: प्रतिष्ठित करने के लिए ही दयानंद सरस्वती ने वेदों की ओर लौटो का नारा दिया। रमेश आर्य ने कहा कि घर को स्वर्ग बनाने के लिए बेटियों को वैदिक शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि एक संस्कार वान कन्या दो घरों को प्रकाशित करती है। आर्य समाज का उद्देश्य बेटियों को संस्कारवान बनाना है। आचार्य सतीश देव ने युवाओं को यग्योपवीत धारण कराकर उसका महत्व बताया। इस अवसर पर देव शास्त्री, जगदीश आर्य, मुकेश आर्य, नेकराम यादव, अमरसिंह आर्य, खुशीराम आर्य, फूल सिंह, जयवीर, लेखपाल आदि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *