फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने लोक सभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 3454 के जबाब में बताया कि सरकार के पास पुरानी पेंशन बहाली सम्बन्धी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है तथा राजकोष पर अस्थिर राजकोषीय देनदारी के कारण ओपीएस बहाली सम्भव नहीं है। जिसे सुनकर कर्मचारियों में रोष व्याप्त है तथा सरकार के इस बयान से कार्मिकों में नाराजगी है। केन्द्र व राज्य के लाखों कर्मचारी अटेवा एनएमओपीएस के बैनर तले वर्षों से ओपीएस के लिए संधर्शरत है। पुरानी पेंशन बहाली के लिए लगातार संघर्षरत अटेवा के प्रदेश संयुक्त मंत्री ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने कहा है कि अपने जीवन के 35 से 40 वर्ष सरकार की सेवा करने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों व अधिकारियों की पेंशन यदि राजकोषीय भार है तो एक दिन के सांसदों विधायकों को मिलने वाली पुरानी पेंशन राकोषीय भार क्यों नहीं है। सरकार एनपीएस में कर्मचारी के वेतन को 14 प्रतिशत तथा यूपीएस में 18.5 प्रतिशत प्रतिमाह हजारों करोड़ रूपये अंशदान के रूप में लगभग 35 से 40 वर्ष तक दे रहीं है। क्या यह राजकोषीय भार नहीं है। एनपीएस व यूपीएस में सरकारी अंशदान कर्मचारी को पूरी सेवाकाल तक देना पड़ता है, जबकि पेंशन अधिकतर 10 या 15 वर्ष तक ही देनी पड़ती हैं। सराकर को एनपीएस व यूपीएस से कोई लाभ नहीं है अंशदान के रूप में प्रतिमाह हजारों करोड़ो रूपया शेयर मार्केट से जिन कम्पनियों में लगाया जा रहा है केवल उन्हीं का फायदा हो रहा है। इसलिए सरकार वही पुरानी जीपीएफ वाली पुरानी पेंशन योजना लागू करे जो कर्मचारी व सरकार दोंनो के लिए लाभकरी है।
ओपीएस न बहाली वाला वित्त मंत्री के बयान से शिक्षक-कर्मचारी नाराज
