मिर्जापुर- शाहजहांपुर(समृद्धि न्यूज) गंगा और रामगंगा में आई प्रलयंकारी बाढ़ जहां नदियों के खादर में बसे गांवों के बाशिंदों के सिर पर आपदा बनकर टूटी है। वहीं राजस्व और पुलिसकर्मियों के लिए यह बाढ़ किसी पिकनिक स्पॉट से कम नहीं है। दैवीय आपदा में बाढ़पीड़ितों की मदद के लिए सरकारी किराए पर लिए गए मोटर वोट में सेफ्टी जैकेट पहने राजस्व और पुलिस विभाग के जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी बाढ़ क्षेत्र की जलमग्न सड़कों पर भ्रमण कर मस्ती लेते घूम रहे हैं। वहीं बाढ़ के पानी से घिरे बाढ़पीड़ित इसी बाढ़ के पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं। गंगा की बाढ़ का पानी ग्राम पैलानी उत्तर,कटैला नगला,लोहार नगला,पंखिया नगला, भरतपुर, मस्जिद नगला,आजाद नगर, इस्लाम नगर आदि दो दर्जन से अधिक गांवों में पहुंच चुका है। क्षेत्र की लगभग सभी सड़के जगह जगह बाद की पानी से कट चुकी हैं। जिससे बाढ़पीड़ितों का आवागमन लगभग थम सा गया है।गंगा की बाढ़ से जलमग्न ग्राम पैलानी उत्तर,भरतपुर,कटैला नगला,लोहार नगला,मस्जिद नगला,आजाद नगर,इस्लाम नगर आदि गांवों के कई घरों में भरे बाढ़ के पानी से बाढ़पीड़ितों के सामने खाने पीने के साथ ही भादों की अंधेरी रात में रोशनी की सबसे बड़ी समस्या है। जलमग्न घरों में सूखे स्थानों पर जहां बाढ़पीड़ित रात काटते हैं,वहीं सांप बिच्छुओं को भी सूखा ही पसंद है। अंधेरी रात में बाढ़पीड़ितों का जीवन खतरे में है। प्रशासनिक अधिकारी मोटर वोट और छोटी नाव को किराए पर लेकर सरकारी खजाने से बाढ़ राहत के बजट में सेंध लगा रहे हैं,वहीं बाढ़पीड़ित काली अंधेरी रात में रोशनी के लिए एक अदद मोमबत्ती के लिए तरस रहे हैं। जलमग्न घरों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे हैंडपंपों से सीधे बाढ़ का पानी निकल रहा है। यही बाढ़ का पानी पीकर बाढ़पीड़ित बीमारियों को दावत दे रहे हैं। दूसरी तरफ बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण और बाढ़पीड़ितों का सर्वे करने वाले राजस्वकर्मी जलमग्न सड़कों पर मोटरबोट से भ्रमण कर फोटो और वीडियो शूट कर उच्चाधिकारियों को भेजकर अपनी कर्मठता और बाढ़पीड़ितों की सेवा में लगे होना प्रमाणित कर रहे हैं। यही नहीं राजस्व विभाग के कर्मचारी बाढ़पीड़ितों के सर्वे के नाम पर प्रधान की चौपाल पर बैठकर वोटर लिस्ट से प्रधान की सलाह पर बाढ़पीड़ितों की सूची बना रहे हैं। जिससे प्रधानों के चहेते परिवारों के कई कई सदस्यों को बाढ़ राहत सामग्री मिल जाएगी तो कई परिवार इस सरकारी खैरात से भी वंचित रह जायेंगे।
बाढ़ पीड़ितों के लिए आपदा, तो राजस्वकर्मियों के लिए पिकनिक स्पॉट से कम नहीं है गंगा की बाढ़
