मांगों को लेकर शिक्षक हुए आंदोलित, दिया धरना

मुख्यमंत्री सम्बोधित ज्ञापन डीआईओएस को सौंपा
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के जिलाध्यक्ष लालाराम दुबे व जिला महामंत्री नरेन्द्र पाल सिंह सोलंकी, कोषाध्यक्ष शैलेश दुबे के नेतृत्व में शिक्षकों की मांगों को लेकर धरना दिया और मुख्यमंत्री सम्बोधित ज्ञापन डीआईओएस को सौंपा।
फतेहगढ़ स्थित डीआईओएस कार्यालय के बाहर बने प्रांगण में अपनी मांगों को लेकर कार्यरत शिक्षकों ने ३१ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दर्शाया कि पुरानी पेंशन पुन: बहाल की जाये। वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतनमान, तदर्थ शिक्षकों का विनियमितीकरण, नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा एवं ऑफलाइन स्थानान्तरण को पूरा किया जाये। बुधवार को शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन कर आंदोलन किया और मांगों को लेकर शीघ्र निस्तारण करने की मांग की। चयन बोर्ड अधिनियम की धारा 12, 18 व 21 की व्यवस्थाओं को पचायत अधिनियमित रूप में मांध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में समाहित किया जाये, साथ ही विद्यालय व छात्रहित में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग 2023 विधेयक की धारा को विलुप्त किया जाये। शिक्षक समुदाय का निश्चित मत है कि एनपीएस अर्थात नई पेंशन योजना शिक्षक की वृद्धावस्था में उसी जीवन स्तर के साथ जीवन यापन करने योग्य नहीं है, जिस जीवन स्तर पर शिक्षक सेवा निवृत्त हो रहा है। पुरानी पेंशन ही वृद्धावस्था का समुचित जीवन स्तर बनाये रखने का माध्यम है। वहीं पुरानी पेशन सरकार बहाल करे। राजकीय शिक्षकों की भांति सहायक माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा अनुमन्य की जाये। 9 नवम्बर 2023 के शासनादेश द्वारा तदर्थ शिक्षकों की सेवाये समाप्त कर दी गयीं है, ऐसे सभी तदर्थ शिक्षकों को विनियमित करते हुए उनकी सेवायें बहाल की जाये। वित्त विहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतनमान के सिद्धान्त पर वेतन एवं सेवा शर्ते लागू की जाये। ऑफलाइन स्थानान्तरण सत्र 2025 की सूची तत्काल निर्गत की जाये। ७वांं वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ था। ८वां वेतन आयोग 01 जनवरी 2026 से देय होता है। वेतन आयोग का गठन शीघ्र किया जाये। विद्यालयों में कार्यरत व्यवसायिक शिक्षकों को भी पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा देते हुए उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धान्त के आधार पर वेतन अनुमन्य किया जाये। शिक्षकों के स्थानान्तरण नीति में आवश्यक संशोधन कर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाय कि शिक्षक अपनी सुविधानुरूप स्थान पर स्थानान्तरण प्राप्त कर सके। ग्रेच्युटी की सीमा राज्य कर्मचारियों की भांति 20 लाख रूपये से बढ़ाकर 25 लाख रूपये की जाये। पेंशन की राशिकृत्त धनराशि की कटौती 10 वर्ष 08 माह के पश्चात बन्द की जाये। न्यायालय के आदेशों के अनुरूप शिक्षक की 62 वर्ष की सेवा पर सेवा निवृत्ति की दशा में ही ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाये। प्रदेश में कार्यरत शिक्षयने एवं कर्मचारियों का कोरोना काल में रोके गये महंगाई भत्ते के अवशेषों का भुगतान किया जाये। वर्ष 2014 से बन्द सामूहिक बीमा को पुन: प्रारम्भ किया जाये। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत कला, व्यायाम, भाषा, शिल्प संगीत आदि शिक्षकों को भी चयन, प्रोन्नत वेतनमान का लाभ अनुमन्य किया जाये। विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षक का पद सूचित करते हुए उस पर तात्काल नियुक्ति की जाये। बोर्ड परीक्षाओं की पारिश्रमिक दरें सीबीएसई के समान की जाये, आदि ३१ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर विजेन्द्र मथुरिया, प्रदीप जायसवाल, शिक्षक नेता संतोष दुबे, सतेन्द्र सिंह, सुनील कुमार, रजनीश शिवा, हिमांशु शुक्ला, ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी, अतुल दास, कर्णवेन्द्र सिंह, ओमपाल सिंह रघुवंशी, प्रेमपाल सिंह, प्रवीण कुमार आदि बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।

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