फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ओम निवास जटवारा जदीद अंगूरीबाग सेवाकेंद्र पर शिक्षक दिवस मनाया गया। शिक्षक दिवस ईश्वर का दूसरा रूप होता है, शिक्षक जो बालपन को खींचता है। बीके शोभा बहन ने कहा कि शिक्षक के बिना हम शिक्षा को प्राप्त नहीं कर सकते। हम अपने जीवन में कितने भी बड़े कामयाब इंसान क्यों न बन जाए, लेकिन हमें शिक्षक को कभी भूला नहीं चाहिए। शिक्षक एक पेड़ की तरह होता है जो अपने सभी विद्यार्थियों पर ज्ञान की छांव हमेशा बनाए रखता है। आज का दिन हमारे शिक्षकों की कड़ी मेहनत और जूनून को स्वीकार करने का दिन है। जिन्होंने हमारे दिमाग को आकार देने और सफलता की राह पर मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण और रचनात्मक भूमिका निभाई है।
प्रबंधक शिवराज श्रीवास्तव ने कहा कि जिस समाज में शिक्षक और शिक्षा का सम्मान नहीं वह समाज मूल्यहीन हो जाता है, इसलिए जो संस्कार माता-पिता नहीं दे पाए वह शिक्षक देता है। कई बार तो ऐसा देखा जाता है जो कई बच्चे ऐसे आज्ञाकारी होने के कारण देश के बड़े से बड़े पद पर आसीन हो जाते हैं, उनके अंदर गुण और मूल्यों की इतनी पराकाष्ठा होती है कि वह एक श्रेष्ठ इंसान बन जाते हैं। मुख्य अतिथि नीरज सक्सेना ने कहा कि अहंकार के बस होकर शिक्षा का ग्रहण करना बहुत कठिन हो जाता है। प्रबंधक देव कुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के शिक्षक और गुरुओं के गुरु परमात्मा स्वयं अब शिक्षक बन पढ़ रहे हैं।
इस अवसर पर महेश पाल सिंह उपकारी, प्रबंधक रामअवतार कुशवाह, बहन अनुजा सोमवंशी, बहन भारती मिश्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस मौके पर पूनम बहन, एकता बहन ने सभी शिक्षकों का विधि पूर्वक तिलक माला फूलों और पटको से सम्मान किया गया। संचालन सुआलाल मिश्र ने किया।
शिक्षक एक पेड़ की तरह जो अपने विद्यार्थियों को ज्ञान की छांव देता है: बीके शोभा
