साक्ष्य के अभाव में हत्या के मामले में आरोपी दोष मुक्त

 विवेचना में त्रुटि करने वाले दोनों विवेचकों पर कार्यवाही के आदेश
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। थाना कादरीगेट क्षेत्र के निवासी संजू पुत्र मंगल सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि मैं व मेरा भाई अजय एक ही मकान में रहते थे। मेरे भाई अजय की शादी सत्यभान पुत्र सियाराम निवासी शिक्षणपुर हरपालपुर हरदोई तय करवा रहा था। इसे सिलसिले में 18 मई 2009 को सत्यभान व उसके साथ दो-तीन अज्ञात व्यक्ति मेरे घर आए और अपने साथ लाए हुए लड्डू सबको दिए। लड्डू मेरे भाई अजय, राजकुमार, चाचा सरवन प्रसाद, माता फूलमती, भांजा छोटू सहित अन्य परिजनों ने भी खाए। जिससे परिवार के सभी लोग बेहोश हो गए। संजू की जब नीद खुली, तो पुलिस को फोन करके बताया और परिवार को इलाज के लिए डॉ0 राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर डॉक्टर ने छोटू को मृतक घोषित कर दिया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा-328, 420, 304 आई.पी.सी. के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचक ने न्यायालय में सत्यभान के विरुद्ध धारा-302, 328, 420 आई.पी.सी. के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिया। विवेचक राकेश सिंह व अशोक कुमार ने विवेचना में त्रुटि करते हुए अस्पताल इलाज के संबंध में कोई साक्ष्य पत्रावली में दाखिल नहीं किये और न अस्पताल के किसी भी कर्मचारी का बयान दर्ज किया। बच्चे की हत्या के संबंध में केस डायरी के अवलोकन में विवेचक ने पंचनामे की कार्यवाही व पोर्टमार्टम के संबंध में कोई प्रपत्र दाखिल किए। दोनों विवेचककों राकेश कुमार सिंह व अशोक कुमार सिंह ने विवेचना में भारी त्रुटि की है। विवेचकगण के द्वारा विवेचना में जल्दीबाजी की गई और अभियुक्तगण को लाभ पहुंचाने के लिए यह लापरवाही की गई। न्यायाधीश अंकित अग्रवाल ने विवेचकगणों के विरुद्ध कार्यवाही के लिए पुलिस महानिदेशक एवं प्रमुख सचिव (ग्रह) उत्तर प्रदेश शासन को लिखा है।

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