समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष जगदेव सिंह उर्फ जग्गा की सिख समुदाय को साधने की कोशिश नाकाम

चुनावों में निष्क्रियता से हार का करना पड़ा सामना

पीलीभीत, समृद्धि न्यूज। जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) की सिख समुदाय को अपने पाले में लाने की रणनीति लगातार कमजोर साबित हो रही है। पार्टी ने सिख समुदाय के प्रभावशाली नेता जगदेव सिंह जग्गा को जिला अध्यक्ष बनाकर इस समुदाय को मजबूत करने का प्रयास किया था, लेकिन चुनावी नतीजों ने इस कदम को नाकाफी साबित कर दिया। पंचायत चुनाव से लेकर हालिया लोकसभा चुनाव तक सपा को सिख वोटों का पूरा फायदा नहीं मिला।जगदेव सिंह जग्गा को जनवरी 2021 में सपा ने पीलीभीत जिला अध्यक्ष का दायित्व सौंपा था।
यह नियुक्ति सिख समुदाय के बीच पार्टी की पैठ मजबूत करने के मकसद से की गई थी, क्योंकि पीलीभीत में सिख आबादी काफी संख्या में बसी हुई है। जग्गा ने 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की सदस्यता अभियान को मजबूती देने का दावा किया था, जिसमें सिख समुदाय को जोड़ने पर जोर दिया गया था।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।पंचायत चुनावों में सपा को जिला पंचायत स्तर पर करारी हार का सामना करना पड़ा। हालिया 2025 के पंचायत चुनावों में पार्टी उम्मीदवारों को सिख बहुल इलाकों में भी समर्थन नहीं मिला, जिससे जिला पंचायत की कई सीटें भाजपा और अन्य दलों के हाथ लग गईं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जग्गा ने समुदाय के साथ संवाद स्थापित करने के बजाय संगठनात्मक कमजोरियों को दूर नहीं किया। एक स्थानीय सपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जग्गा की नियुक्ति तो दिखावे की थी, लेकिन सिख समुदाय के युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। नतीजा, पंचायत चुनावों में हमारी हार हुई।”लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम तो और भी निराशाजनक रहे। पीलीभीत लोकसभा सीट से सपा के उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार को भाजपा के जितिन प्रसाद से करीब 1,64,935 वोटों से हार झेलनी पड़ी। प्रसाद को 6,07,158 वोट मिले, जबकि गंगवार को केवल 4,42,223 वोट ही हासिल हो सके।
सिख समुदाय के वोटों का बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर खिसक गया, जो जग्गा की असफलता का स्पष्ट संकेत है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सिख वोट सपा के पक्ष में होते, तो मुकाबला कांटे का होता।सपा के प्रदेश नेतृत्व पर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या जग्गा को जिम्मेदारी से हटाया जाना चाहिए? पार्टी सूत्रों के अनुसार, आगामी संगठनात्मक चुनावों में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। जग्गा ने संपर्क करने पर कहा, “हमने पूरी कोशिश की, लेकिन विपक्ष की साजिशों ने नुकसान पहुंचाया।” लेकिन पार्टी के अंदरूनी सर्कल में यह स्वीकार किया जा रहा है कि सिख समुदाय को साधने के लिए नई रणनीति जरूरी है।

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