यूएनजीए में बोले विदेश मंत्री जयशंकर, भारत ने आतंकी ठिकानों पर की कार्रवाई

पाकिस्तान बना वैश्विक आतंकवाद का अड्डा
समृद्धि न्यूज। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर हमला बोला और वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत के रुख को पेश किया। उन्होंने पहलगाम हमला, आतंकवादियों के वित्तपोषण और उनके सार्वजनिक महिमामंडन की निंदा की। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र को भारत के विदेश मंत्री डॉ0 एस0 जयशंकर संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विश्व के विभिन्न देशों से पहुंचे नेताओं के सामने आतंकवाद को लेकर दो टूक बात कही, उन्होंने पहलगाम का हमला काफी बर्बर था। भारत का पड़ोसी आतंकवाद का एपिसेंटर है, भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को रोकना अब वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए। इसे जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।े उन्होंने कहा कि भारत दशकों से आतंकवाद का शिकार रहा है, इसका कारण है उनका पड़ोसी देश, उनका यह पड़ोसी देश लंबे समय से श्वैश्विक आतंकवाद का केंद्र माना जाता रहा है। विदेश मंत्री डॉ0 एस0 जयशंकर के इस संबोधन को भारत की ओर से वैश्विक आतंकवाद पर अब तक की सबसे स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह की सहनशीलता या रियायत न दिखाई जाए औ सख्त कार्रवाई हो।

भारत स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से लड़ रहा

उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है, क्योंकि यह घृणा, हिंसा, असहिष्णुता और भय का मिश्रण है। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अपनाता है, आतंकवादी केंद्र औद्योगिक स्तर पर संचालित होते हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है, तो ऐसे कार्यों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह बंद करने, प्रमुख आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने और पूरे आतंकवादी तंत्र पर लगातार दबाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश या संस्था आतंक को बढ़ावा देने वाले देशों का समर्थन करेंगे, उन्हें इसका नकारात्मक परिणाम भुगतना पड़ेगा। जयशंकर का यह भाषण भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और वैश्विक सुरक्षा में सक्रिय भूमिका को स्पष्ट करता है। डॉ0 एस0 जयशंकर ने सवाल उठाया कि आज हमें यह सोचना होगा कि क्या संयुक्त राष्ट्र वैश्विक अपेक्षाओं पर खरा उतर पाया है।

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