दहेज हत्या के मामले में अभियुक्त को दस वर्ष का कारावास

12 हजार रुपए के अर्थदंड से किया गया दंडित
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। अपर जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश विशेष ई0सी0 एक्ट न्यायाधीश तरुण कुमार सिंह ने आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करना व दहेज हत्या के मामले में दिलीप कुमार उर्फ विजय कुमार पुत्र सतीश चंद्र निवासी गदनपुर देवराजपुर कमालगंज को दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में लेकर दस वर्ष का कारावास व 12 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया।
बीते 12 वर्षों पूर्व थाना कमालगंज पुलिस को 5 अप्रैल 2011 को चंद्रशेखर पुत्र छक्कू निवासी सेंगरमऊ कन्नौज ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि मंैने अपनी भतीजी चित्रा की शादी आज से लगभग 8 माह पूर्व दिलीप के साथ 18 जुलाई 2010 को की थी। साथ में अपनी सामथ्र्य के अनुसार दान दहेज दिया था, लेकिन दिए हुए दान दहेज से चित्रा के पति, दिलीप, ससुर सतीश चंद्र, सास खुश नहीं थे और दहेज में एक मोटर साइकिल पल्सर, पचास हजार रुपए नगद की मांग को लेकर चित्रा का उत्पीडऩ करते थे। जब हम लोग चौथी की विदा के लिए गए, तो इन लोगों ने हमसे मोटर साइकिल व पैसों की मांग की। हम लोगों के समझाने का प्रयास किया, लेकिन उक्त लोग नहीं मानें। लगभग 15 दिन पहले चित्रा का भाई देवीनंदन गया था। ससुराल वालों ने कहा दहेज नहीं दिया अंजाम भुगतने के लिया तैयार हो जाना। ०४ अप्रैल 2011 को मेरे बहनोई महेंद्र ने बताया कि चित्रा को उसके ससुरालवालों ने मार दिया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचक ने साक्ष्य गवाह के आधार पर दिलीप उर्फ विजय, सतीश के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। न्यायलय ने 319 के तहत माया देवी को तलब कर लिया था। बचाव पक्ष की दलील व शासकीय अधिवक्ता अखिलेश कुमार राजपूत, श्रवण कुमार की पैरवी के आधार पर न्यायाधीश तरुण कुमार सिंह ने दिलीप उर्फ विजय को दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में लेकर दस वर्ष का कारावास व 12 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। साक्ष्य के अभाव से सतीश चंद्र, माया देवी को दोष मुक्त कर दिया गया।

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