हरदोई से संतोष तिवारी की रिपोर्ट
सीएचसी पर रोजाना आते हैं सैकड़ों मरीज,
हरदोई , समृद्धि न्यूज। शाहाबाद सीएचसी में उधारी के डॉक्टरों से काम चलाया रहा है। यहां पर सीएचसी की कमान एक ऐसे डॉक्टर के पास रहती है जो मरीजों से भेदभाव करते हुये इलाज करते हैं।तथा अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोरों से मंहगी दवाईयां लिखकर मरीजों का दम घोंटा जा रहा है।सीएचसी में इस समय एक हजार से अधिक विभिन्न प्रकार के रोगी प्रतिदिन अस्पताल आ रहे हैं।डिप्टी सीएम की लाख सख्ती के बाबजूद यहाँ पर विभागीय व्यवस्थाएं बौनी साबित हो रही हैं। यहां पर रोजाना आने वाले सैकड़ों मरीजों को देखने का जिम्मा एक ही डॉक्टर के पास रहता है।ऐसा नजारा यहाँ रोजाना देखने को मिल सकता है।वैसे इस मौसम में रोगियों की संख्या बहुतायत है लेकिन यहां दवाओं के साथ साथ डॉक्टरों का भी टोटा देखने को मिल रहा है।इधर स्वास्थ्य मंत्री के बढ़ते दखल के बाद भी सीएचसी में डॉक्टरों की कमी व दवाओं का अभाव जैसी अव्यवस्थाएं दूर नहीं हो पा रही है। सीएचसी में घंटों लाइन में लगने के बाद मरीजों को जब डाक्टर नहीं मिलता तो बड़ी लाचारी के साथ या तो फार्मासिस्ट से दवा लेते हैं या सरकारी अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर्स से दवाएं खरीद कर वापस लौट जाते हैं।आम लोगों का कहना है कि विभाग की लापवाही के कारण ही मरीजों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है।क्योंकि सीएचसी के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग कर्तव्यों के प्रति सजग नही दिखते। एक अनार सौ बीमार वाली कहावत यहाँ सीएचसी पर हो रही चरितार्थ, शाहाबाद सीएचसी में एक अनार सौ बीमार वाली कहावत पूरी तरह फिट बैठ रही है।यहाँ अधीक्षक के अलावा महज एक डॉक्टर जीशान खान की तैनाती है।एक डॉक्टर को एक हजार से अधिक मरीजों को देखना पड़ता है यह किसी भी कीमत पर सम्भव नहीं हो सकता।सीएचसी पर महिला मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है लेकिन यहाँ कोई महिला डॉक्टर नही बैठती है जबकि यहाँ पर महिला डॉक्टर की भी तैनाती बताई जा रही है।जोकि इस समय लंबी छुट्टी पर हैं इसलिए यहां आने वाली महिलाओं को भारी दिक्कत उठानी पड़ती है।
सीएचसी में एक महिला आयुष सहित 4 आयुष डॉक्टर तैनात, यहाँ पर आयुष डॉक्टरों की बात करें तो एक महिला समेत 4 आयुष डॉक्टर तैनात हैं।जिनमें एक की तैनाती आयुर्वेदिक अस्पताल में है लेकिन वह सीएचसी में बैठकर मरीज देखते हैं।एक की तैनाती हर्रई पीएचसी पर है वह न तो कभी पीएचसी जाते हैं और न ही कहीं दिखाई पड़ते।होम्योपैथी डॉक्टर खुद अपना क्लीनिक चला रहे हैं।इसलिये उनको फुर्सत नहीं मिलती।जो महिला आयुष डॉक्टर हैं उनका अपना खुद का बड़ा निजी अस्पताल है।वह कभो भी ड्यूटी नही आती हैं।इसलिये मरीजों को समुचित लाभ नहीं मिल पाता।
पीएचसी के डॉक्टरों की बारी बारी से लगाई जाती है यहाँ पर ड्यूटी, सीएचसी शाहाबाद के अंतर्गत हर्रई पीएचसी और दलेल नगर पीएचसी के प्रभारी की भी सीएचसी में ड्यूटी लगाई जाती है।दलेल नगर पीएचसी प्रभारी को 3 दिन यहाँ पर मरीज देखने के लिए लगाया जाता है।इन्ही डॉक्टरों में से सप्ताह में पोस्टमार्टम हाउस पर 2 दिन ड्यूटी लगाई जाती है।
स्वीपर,वार्ड ब्याय,फार्मासिष्ट के सहारे रहती हैं पीएचसी, शाहाबाद क्षेत्र की तमाम पीएचसी तो स्वीपर ही चलाते हैं।गाहे बगाहे बार्ड ब्याय पँहुच जाते हैं।फार्मासिष्ट तो पीएचसी पर जाने में अपनी तौहीन सी समझते है।इसलिये इन सभी जिम्मेदारों की अनदेखी से स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है,सरकारी दावे हवा हवाई साबित हो रहें हैं।
दम्पति डॉक्टर और अधीक्षक की तैनाती, यहां पर डॉक्टरों की बात करें तो एक दम्पति डॉक्टर जीशान और उनकी पत्नी फराना जमीर के अलावा सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर प्रवीण दीक्षित की तैनाती है।डॉक्टर दीक्षित प्रसाशनिक बैठकों और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े क्षेत्रीय कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं।इसलिये उनका मरीज देख पाना सम्भव नही है।ऐसी स्थिति में महज एक डॉक्टर के लिये एक हजार से अधिक मरीजों को रोजाना देख पाना आकाश में तीर मारने जैसा ही है।खास बात यह है कि यहां पर दत्त रोग विशेषज्ञ यानी बीडीएस डाक्टर से सामान्य मरीजों को देखने से लेकर मेडिकल परीक्षण भी कराया जाता।
उधारी के डॉक्टरों से स्वस्थ जीवन कल्पना में जी रहा स्वास्थ्य विभाग,
